Breaking News

होटल लेवाना के अग्निकांड का सच आया समाने

लखनऊ। जांच टीम ने लखनऊ के लेवाना होटल में आग लगने की घटना की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है. जांच टीम की रिपोर्ट के मुताबिक न सिर्फ होटल प्रबंधन ने लापरवाही बरती बल्कि लखनऊ विकास प्राधिकरण और दमकल विभाग की भी लापरवाही सामने आई है. होटल का निर्माण न केवल अवैध था, बल्कि इसमें अग्नि सुरक्षा का कोई प्रावधान नहीं था। लखनऊ के लेवाना होटल में सोमवार को लगी आग में न सिर्फ चार लोगों की मौत हो गई, बल्कि एक दर्जन से ज्यादा लोग घायल भी हो गए. कई लोगों का इलाज भी चल रहा है। यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए थे। जिसके बाद संभागीय आयुक्त लखनऊ और पुलिस आयुक्त ने संयुक्त रूप से मामले की जांच कर अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है.
प्रारंभिक जांच के अनुसार इस होटल का निर्माण अवैध था, जिसका नक्शा पास तक नहीं था। इसके लिए लखनऊ विकास प्राधिकरण के 22 इंजीनियरों को जिम्मेदार माना गया है, लेकिन सरकार को इस बात पर आपत्ति है कि इसके लिए न सिर्फ इंजीनियर बल्कि अधिकारी-कर्मचारी भी जिम्मेदार हैं. जांच में यह भी पता चला है कि होटल में अग्नि सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं थे। होटल में अग्नि सुरक्षा की कोई व्यवस्था नहीं थी, जिसके लिए होटल को कई बार नोटिस दिए गए, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई।


होटल में बिजली व्यवस्था अनियमित थी। तीन कनेक्शन लिए गए, लेकिन वह भी मानक के अनुरूप नहीं था। पूरे होटल की बिजली की आवश्यकता उससे कम लोड पर ली जा रही थी, जिससे शॉर्ट सर्किट होने की पूरी संभावना थी। कोई धूम्रपान निकास प्रणाली नहीं थी और कोई फायर अलार्म सिस्टम नहीं था, जबकि होटल में एक रसोईघर, बार और भोज था।
जांच टीम ने मौके का मुआयना किया तो पाया कि गैस सिलेंडर असुरक्षित रखे हुए थे, यहां तक कि होटल में घरेलू सिलेंडर का भी इस्तेमाल किया जा रहा था। होटल की खिड़कियों के बाहर लोहे की मोटी ग्रिल लगाई गई थी, जिससे बाहर की खिड़कियां नहीं खुल सकीं और लोग फंस गए. होटल मालिकों ने ग्रुप हाउसिंग के नक्शे के लिए आवेदन किया था, लेकिन बाद में अवैध रूप से उसमें होटल बना लिया, जो पांच साल से अधिक समय से चल रहा था।
कमी न केवल लखनऊ विकास प्राधिकरण या दमकल विभाग बल्कि प्रशासन की भी सामने आई है। होटल सराय एक्ट के तहत पंजीकृत भी नहीं था। जब होटल लेवाना सराय एक्ट के तहत पंजीकृत नहीं था तो दमकल विभाग ने एनओसी देते समय इस पर ध्यान क्यों नहीं दिया। यानी सराय एक्ट में बिना रजिस्ट्रेशन के यह होटल पांच साल से ज्यादा समय से चल रहा था तो स्थानीय प्रशासन ने कोई कार्रवाई क्यों नहीं की. अब जांच समिति ने प्रारंभिक जांच सरकार को सौंप दी है, जल्द ही बिंदुवार जांच कर इसकी पूरी रिपोर्ट तैयार की जाएगी. हालांकि इस मामले में होटल मालिक राहुल अग्रवाल, रोहित अग्रवाल और जीएम सागर श्रीवास्तव को जेल भेज दिया गया है, जबकि एक मालिक पवन अग्रवाल अभी फरार है.

Check Also

दुग्ध संघों के सुदृढ़ीकरण के लिए 13.33 करोड़ रूपये जारी

लखनऊ,(माॅडर्न ब्यूरोक्रेसी न्यूज)। उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रदेश में डेयरी विकास के लिए दुग्ध संघों …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *