इजरायली तकनीक पर आधारित हाइटेक नर्सरी, किसानों और स्वयं सहायता समूहों को मिलेगा लाभ

Getting your Trinity Audio player ready...

लखनऊ,(माॅडर्न ब्यूरोक्रेसी न्यूज)ः उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के नेतृत्व व निर्देशन में किसानो को विभिन्न प्रजातियों के उच्च क्वालिटी के पौधे उपलब्ध कराने के उद्देश्य से इजरायली तकनीक पर आधारित हाइटेक नर्सरी तैयार की जा रही है। यह कार्य मनरेगा अभिसरण के तहत उद्यान विभाग के सहयोग से कराया जा रहा है और राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत गठित स्वयं सहायता समूहों की दीदियां भी इसमें हांथ बंटा रही है। इससे स्वयं सहायता समूहों को काम मिल रहा है। उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने बताया कि इस योजना के क्रियान्वयन से कृषि और औद्यानिक फसलों को नई ऊंचाई मिलेगी। विशेष तकनीक का प्रयोग करके ये नर्सरी तैयार की जा रहीं हैं। सरकार की मंशा है कि प्रदेश का हर किसान समृद्ध बने और बदलते समय के साथ किसान हाईटेक भी बने।
उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने बताया कि सरकार पौधरोपण को बढ़ावा देने के साथ बागबानी से जुड़े किसानों को भी आर्थिक रूप से मजबूत बनाने का काम कर रही है। मनरेगा योजना से 150 हाईटेक नर्सरी बनाने के लक्ष्य के साथ तेजी से कार्य किया जा रहा है। उप मुख्यमंत्री मौर्य के निर्देश व पहल पर ग्राम्य विकास विभाग ने इसको लेकर प्रस्ताव तैयार किया था,जिसको लेकर जमीनी स्तर पर युद्धस्तर पर कार्य हो रहा है। हाईटेक नर्सरी से किसानों की आर्थिक स्थिति भी मजबूत हो रही है। प्रदेश भर में 150 हाईटेक नर्सरी बनाने का लक्ष्य रखा गया है। 125 साइटों के सापेक्ष 67 साइटों पर हाईटेक नर्सरी बनाने का कार्य प्रारंभ किया जा चुका है, जिसमें से 38 हाईटेक नर्सरी पर कार्य पूर्ण किया गया है। नर्सरी की देख-रेख करने के लिए स्वयं सहायता समूह को जिम्मेदारी दी गई है। समूह के सदस्य नर्सरी का काम देखते हैं, जो पौधों की सिंचाई, रोग, खाद-बीज आदि का जिम्मा संभालते हैं। इसके लिए स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को प्रशिक्षण भी दिया जा चुका है। सरकार उच्च क्वालिटी व उन्नत किस्म के पौधों की नर्सरी को बढ़ावा देने के लिए तेजी से काम कर रही है। प्रत्येक जनपद में पौधशालाएं बनाने का कार्य किया जा रहा है। इनमें किसानों को फूल और फल के साथ सर्पगंधा, अश्रवगंधा, ब्राह्मी, कालमेघ, कौंच,सतावरी, तुलसी, एलोवेरा जैसे औषधीय पौधों को रोपने के लिए जागरूक किया जा रहा है। किसानों को कम लागत से अधिक फायदा दिलाने के लिए पौधरोपण की नई तकनीक से जोड़ा जा रहा है। ग्राम्य विकास आयुक्त जी.एस. प्रियदर्शी ने बताया कि प्रदेश में 150 हाईटेक नर्सरी के निर्माण की कार्यवाही निरंतर की जा रही है, जिसके सापेक्ष 126 हाईटेक नर्सरी की स्वीकृति जनपद स्तर पर की जा चुकी है। अब तक 67 साइटों पर कार्य प्रारंभ किया जा चुका है, जिसमें से 38 हाईटेक नर्सरी पर कार्य पूर्ण किया गया है। पूर्ण 38 हाईटेक नर्सरी में से 11 साइट पर सिडलिंग प्रोडक्शन का कार्य प्रारम्भ, है व 19 साइटों पर ट्रायल रन की कार्यवाही प्रक्रियाधीन है एवं 8 ट्रायल रन पूर्ण किया जा चुका है।

 

Check Also

Мега сб: подводные камни и возможности 2026

Содержание Что такое мега сб? Преимущества мега даркнет Как использовать мега онион Сравнение с мегой …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *