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लखनऊ/दिल्ली,(मॉडर्न ब्यूरोक्रेसी न्यूज)ः देश की राजधानी नई दिल्ली आज एक बार फिर बड़े राजनीतिक और नागरिक आंदोलन का केंद्र बन गई है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा आयोजित “दिल्ली चलो” विरोध प्रदर्शन को लेकर शनिवार को दिल्ली की सीमाओं से लेकर लुटियंस जोन तक भारी तनाव का माहौल देखा जा रहा है। मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता की मांग को लेकर बुलाए गए इस प्रदर्शन को पुलिस की अनुमति नहीं मिलने के बावजूद हजारों प्रदर्शनकारी दिल्ली कूच कर रहे हैं। आंदोलन को दबाने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए दिल्ली पुलिस ने सख्त रुख अपनाते हुए CJP के शीर्ष नेतृत्व और देश के प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया है।
एयरपोर्ट पर हाई-वोल्टेज ड्रामा: शीर्ष नेता हिरासत में
शनिवार सुबह उस वक्त भारी हंगामा खड़ा हो गया जब CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके, प्रमुख कार्यकर्ता आशुतोष रांका और खोजी पत्रकार व कार्यकर्ता सौरव दास को दिल्ली हवाई अड्डे पर उतरते ही पुलिस ने रोक लिया। प्रत्यक्षदर्शियों और सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो के अनुसार, जैसे ही इन नेताओं की फ्लाइट दिल्ली एयरपोर्ट के रनवे पर लैंड हुई, पुलिस बल विमान के भीतर दाखिल हो गया। नेताओं को फ्लाइट से बाहर कदम रखने से पहले ही विमान के अंदर ही हिरासत में ले लिया गया। इस कार्रवाई का वीडियो इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें सुरक्षाकर्मी और नेताओं के बीच तीखी बहस होती देखी जा सकती है।
शनिवार सुबह उस वक्त भारी हंगामा खड़ा हो गया जब CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके, प्रमुख कार्यकर्ता आशुतोष रांका और खोजी पत्रकार व कार्यकर्ता सौरव दास को दिल्ली हवाई अड्डे पर उतरते ही पुलिस ने रोक लिया। प्रत्यक्षदर्शियों और सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो के अनुसार, जैसे ही इन नेताओं की फ्लाइट दिल्ली एयरपोर्ट के रनवे पर लैंड हुई, पुलिस बल विमान के भीतर दाखिल हो गया। नेताओं को फ्लाइट से बाहर कदम रखने से पहले ही विमान के अंदर ही हिरासत में ले लिया गया। इस कार्रवाई का वीडियो इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें सुरक्षाकर्मी और नेताओं के बीच तीखी बहस होती देखी जा सकती है।
CJP नेतृत्व के अलावा, प्रशासन ने विपक्ष और नागरिक समाज के कई अन्य प्रमुख चेहरों पर भी शिकंजा कसा है। मशहूर यूट्यूबर ध्रुव राठी, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (CPI-M) की नेता वृंदा करात और केरल के पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन समेत सैकड़ों कार्यकर्ताओं को जंतर-मंतर पहुंचने से पहले ही अलग-अलग स्थानों से पुलिस हिरासत में ले लिया गया है। हिरासत में लिए गए नेताओं का आरोप है कि सरकार शांतिपूर्ण प्रदर्शन के मौलिक अधिकार को कुचलने के लिए पुलिस बल का दुरुपयोग कर रही है।

किले में तब्दील हुई दिल्ली: यातायात और इंटरनेट ठप
इस बड़े प्रदर्शन के आह्वान को देखते हुए दिल्ली पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों ने अभूतपूर्व सुरक्षा इंतजाम किए हैं। पूरी नई दिल्ली और जंतर-मंतर इलाके को छावनी में बदल दिया गया है। दिल्ली की सीमाओं (सिंघू, टीकरी और गाजीपुर बॉर्डर) पर 35,000 से अधिक पुलिस और अर्धसैनिक बलों के जवान मुस्तैद हैं। सड़कों पर कंक्रीट के बैरिकेड्स, कंटीले तार और वाटर कैनन की गाड़ियां तैनात की गई हैं ताकि प्रदर्शनकारियों के जत्थों को दिल्ली में प्रवेश करने से रोका जा सके।
इस बड़े प्रदर्शन के आह्वान को देखते हुए दिल्ली पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों ने अभूतपूर्व सुरक्षा इंतजाम किए हैं। पूरी नई दिल्ली और जंतर-मंतर इलाके को छावनी में बदल दिया गया है। दिल्ली की सीमाओं (सिंघू, टीकरी और गाजीपुर बॉर्डर) पर 35,000 से अधिक पुलिस और अर्धसैनिक बलों के जवान मुस्तैद हैं। सड़कों पर कंक्रीट के बैरिकेड्स, कंटीले तार और वाटर कैनन की गाड़ियां तैनात की गई हैं ताकि प्रदर्शनकारियों के जत्थों को दिल्ली में प्रवेश करने से रोका जा सके।
प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों की आवाजाही को रोकने के लिए दिल्ली आने वाली करीब 250 ट्रेनों को रद्द कर दिया है। इसके साथ ही सेंट्रल दिल्ली के कई प्रमुख मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश और निकास द्वारों को सुरक्षा कारणों से बंद कर दिया गया है। जंतर-मंतर और उसके आसपास के संवेदनशील इलाकों में कानून-व्यवस्था बनाए रखने और अफवाहों को फैलने से रोकने के लिए मोबाइल इंटरनेट सेवाओं को भी अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया गया है। इस नाकाबंदी के कारण आम जनता को भारी ट्रैफिक जाम और आवाजाही में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
क्या हैं प्रदर्शनकारियों की मांगें?
CJP और सहयोगी संगठनों का यह विरोध प्रदर्शन मुख्य रूप से देश की चुनावी प्रणाली और मतदाता सूचियों में सुधार को लेकर है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि हालिया मतदाता सूचियों में बड़े पैमाने पर विसंगतियां हैं, जिसके कारण लाखों वैध मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं। CJP की मुख्य मांग है कि मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार तुरंत अपने पद से इस्तीफा दें और मतदाता सूचियों की स्वतंत्र व पारदर्शी जांच कराई जाए। नेताओं का कहना है कि जब तक उनकी मांगें नहीं मानी जातीं, उनका यह शांतिपूर्ण सत्याग्रह जारी रहेगा।
CJP और सहयोगी संगठनों का यह विरोध प्रदर्शन मुख्य रूप से देश की चुनावी प्रणाली और मतदाता सूचियों में सुधार को लेकर है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि हालिया मतदाता सूचियों में बड़े पैमाने पर विसंगतियां हैं, जिसके कारण लाखों वैध मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं। CJP की मुख्य मांग है कि मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार तुरंत अपने पद से इस्तीफा दें और मतदाता सूचियों की स्वतंत्र व पारदर्शी जांच कराई जाए। नेताओं का कहना है कि जब तक उनकी मांगें नहीं मानी जातीं, उनका यह शांतिपूर्ण सत्याग्रह जारी रहेगा।
दूसरी ओर, सरकार और चुनाव आयोग ने इन आरोपों को निराधार बताया है। पुलिस प्रशासन का तर्क है कि दिल्ली में धारा 144 लागू होने और सुरक्षा इनपुट के कारण इस बड़े जमावड़े की अनुमति नहीं दी जा सकती थी। इस बीच, दिल्ली में पारगमन व्यवस्था और सार्वजनिक परिवहन को पूरी तरह ठप करने के पुलिसिया कदम के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक अवमानना याचिका (Contempt Petition) भी दायर की गई है, जिस पर आने वाले दिनों में सुनवाई हो सकती है।
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