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लखनऊ/दिल्ली,(मॉडर्न ब्यूरोक्रेसी न्यूज)ः देशव्यापी भारी विरोध प्रदर्शनों और सोशल मीडिया पर बढ़ते जनआक्रोश के बीच मोदी सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। विपक्ष के तीखे हमलों और सड़क से लेकर इंटरनेट तक फैले असंतोष के बाद, केंद्र सरकार ने देश में काम कर रहे सभी प्रमुख सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को कड़ा रुख अपनाते हुए सतर्क रहने की सलाह (एडवाइजरी) जारी की है। इस फैसले के बाद राजनीतिक गलियारों और डिजिटल स्पेस में हलचल तेज हो गई है। पिछले कुछ हफ्तों से विभिन्न सरकारी नीतियों, आर्थिक मुद्दों और स्थानीय विवादों को लेकर देश के अलग-अलग हिस्सों में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन देखने को मिल रहे हैं। इन प्रदर्शनों की गूंज जितनी सड़कों पर है, उससे कहीं अधिक तीव्रता के साथ यह सोशल मीडिया पर ट्रेंड कर रही है। एक्स (ट्विटर), फेसबुक, इंस्टाग्राम और यूट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म्स पर सरकार विरोधी हैशटैग्स और वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं।
सूत्रों के मुताबिक, सरकार इस बात को लेकर चिंतित है कि सोशल मीडिया के जरिए विरोध प्रदर्शनों को और हवा दी जा रही है। खुफिया एजेंसियों और आईटी मंत्रालय की आंतरिक समीक्षा बैठकों के बाद यह निष्कर्ष निकाला गया कि कई जगहों पर “भ्रामक सूचनाएं” और “उत्तेजक कंटेंट” साझा किए जा रहे हैं, जिससे कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ सकती है। इसी पृष्ठभूमि में सरकार ने एक आपातकालीन कदम उठाते हुए डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए नई चेतावनी जारी की। सरकार का रुख साफ है कि अभिव्यक्ति की आजादी का सम्मान है, लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था की कीमत पर सोशल मीडिया का दुरुपयोग बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
एडवाइजरी में क्या कहा गया है?
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) द्वारा जारी इस ताजा दिशा-निर्देश में सभी सोशल मीडिया कंपनियों को अपनी निगरानी व्यवस्था (मॉडरेशन सिस्टम) को तुरंत मजबूत करने के लिए कहा गया है। सरकार ने मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित करने की सलाह दी है:
- भ्रामक और भड़काऊ सामग्री पर रोक: किसी भी ऐसी पोस्ट, वीडियो या ऑडियो को तुरंत हटाया जाए जो सार्वजनिक शांति को भंग कर सकती है या हिंसा को बढ़ावा दे सकती है।
- अल्गोरिदम की समीक्षा: टेक कंपनियों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने अल्गोरिदम की जांच करें ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि कोई भी कृत्रिम रूप से या बॉट्स के जरिए सरकार विरोधी एजेंडा या फर्जी खबरों को ट्रेंड नहीं करवा रहा है।
- नोडल अधिकारियों की सक्रियता: सभी प्लेटफॉर्म्स के शिकायत और अनुपालन अधिकारियों (Grievance Officers) को 24×7 सक्रिय रहने और सरकारी आदेशों पर त्वरित कार्रवाई करने के लिए कहा गया है।
विपक्ष का पलटवार: “आवाज दबाने की कोशिश”
सरकार के इस कदम पर मुख्य विपक्षी दलों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया है कि मोदी सरकार चौतरफा विरोध से पूरी तरह “बिलबिला” गई है और अपनी नाकामियों को छुपाने के लिए अब जनता की आवाज को दबाना चाहती है। विपक्षी प्रवक्ताओं का कहना है कि जब लोग सड़कों पर अपनी जायज मांगों के लिए उतर रहे हैं, तो सरकार संवाद करने के बजाय इंटरनेट और सोशल मीडिया पर सेंसरशिप लगाने की तैयारी कर रही है। डिजिटल राइट्स कार्यकर्ताओं ने भी इस एडवाइजरी पर चिंता व्यक्त की है। उनका मानना है कि इस तरह की सख्त चेतावनियों से सोशल मीडिया कंपनियां डरी रहती हैं और वे अक्सर सुरक्षित रहने के लिए सामान्य और शांतिपूर्ण आलोचनात्मक आवाजों को भी ब्लॉक या सेंसर कर देती हैं।
यह पहली बार नहीं है जब सरकार और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के बीच इस तरह का टकराव देखने को मिला है। आईटी नियमों को लेकर पहले भी लंबी कानूनी और राजनीतिक बहसें हो चुकी हैं। लेकिन वर्तमान माहौल में, जहां एक तरफ जमीनी विरोध चरम पर है, वहीं दूसरी तरफ डिजिटल नैरेटिव को नियंत्रित करने की यह कोशिश आने वाले दिनों में सरकार और नागरिक समाज के बीच तनाव को और बढ़ा सकती है। अब देखना यह होगा कि टेक कंपनियां सरकार की इस ‘सतर्क रहने की सलाह’ पर कितनी सख्ती से अमल करती हैं और इसका आने वाले जन-आंदोलनों पर क्या असर पड़ता है।
Modern Bureaucracy