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प्रदेश की 40 हजार मेधावी छात्राओं को जल्द मिलेगी स्कूटी-उच्च शिक्षा मंत्री

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लखनऊ,(मॉडर्न ब्यूरोक्रेसी न्यूज)ः प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय शनिवार को लखनऊ के चौक स्थित खुनखुन जी गर्ल्स पी.जी. कॉलेज के भव्य वार्षिकोत्सव एवं प्रतिभा सम्मान समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में सम्मिलित हुए। कार्यक्रम की अध्यक्षता लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. जय प्रकाश सैनी ने की। इस अवसर पर उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार बेटियों की शिक्षा और उनके सशक्तीकरण के लिए निरंतर ऐतिहासिक कदम उठा रही है। उन्होंने बताया कि दूर-दराज के क्षेत्रों से उच्च शिक्षा प्राप्त करने आने वाली छात्राओं को आवागमन की सुविधा देने तथा संसाधनों के अभाव में होने वाले ड्रॉप-आउट को रोकने के लिए राज्य सरकार जल्द ही श्मुफ्त स्कूटी योजना लागू करने जा रही है।  इसके तहत प्रदेश भर की लगभग 40 हजार मेधावी छात्राओं को स्कूटी प्रदान की जाएगी।

इसके पूर्व प्रदेश के युवाओं को डिजिटल व तकनीकी रूप से सक्षम बनाने हेतु बड़े पैमाने पर टैबलेट व स्मार्टफोन वितरित किए जा चुके हैं। उच्च शिक्षा मंत्री ने छात्राओं से संवाद करते हुए कहा कि शिक्षा मात्र नौकरी पाने या व्यवसाय करने का साधन नहीं है, बल्कि वास्तविक शिक्षा वह है जो हमारे भीतर उच्च चरित्र का निर्माण करे, व्यक्ति का विकास करे तथा समाज व मानवता की सेवा का भाव जागृत करे। उन्होंने कहा कि संस्कार विहीन शिक्षा समाज में कभी आदर का पात्र नहीं बन सकती। स्वामी विवेकानंद के विचारों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि युवाओं को आने वाले समय में अपने राष्ट्र को ही सर्वाेपरि मानना होगा। हमारा इष्ट देव केवल भारत राष्ट्र और इष्ट देवी केवल भारत माता होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत आज दुनिया की चौथी-पांचवीं सबसे बड़ी आर्थिक महाशक्ति बनकर उभरा है और हमने उस ब्रिटेन को भी पीछे छोड़ दिया है जिसने कभी हम पर राज किया था। उन्होंने वर्ष 2047 तक भारत को श्विकसित भारतश् बनाने के संकल्प में युवा पीढ़ी से सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया। मंत्री जी ने स्पष्ट किया कि सीमा पर लड़ने वाले सैनिकों के साथ-साथ समाज द्वारा सौंपी गई जिम्मेदारियों का ईमानदारी और समर्पण से निर्वहन करना ही सच्ची राष्ट्रभक्ति है। उच्च शिक्षा मंत्री उपाध्याय ने पुरस्कार प्राप्त करने वाली छात्राओं के साथ-साथ उनके माता-पिता और गुरुजनों को बधाई देते हुए कहा कि माता-पिता के संघर्षों व रातों के त्याग तथा शिक्षकों द्वारा तराशी गई प्रतिभा के फलस्वरूप ही विद्यार्थी सफलता के मुकाम तक पहुंचते हैं। किसी कारणवश पिछड़ने वाले विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन करते हुए उन्होंने कवि नीरज की पंक्तियोंकृ ’कुछ सपनों के मर जाने से जीवन नहीं मरा करता’ का स्मरण कराया और निरंतर प्रयास करने की प्रेरणा दी। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. जय प्रकाश सैनी ने कहा कि जब पूरी दुनिया में उच्च शिक्षा की कोई अवधारणा नहीं थी, उस समय प्राचीन भारत में नालंदा, तक्षशिला, विक्रमशिला और भोजशाला जैसे 17 विश्वप्रसिद्ध विश्वविद्यालय संचालित थे, जहां विश्व भर से हजारों छात्र अध्ययन करने आते थे। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति में प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा, संस्कार, रोजगार और आधुनिक तकनीक का अद्भुत समन्वय है, जो भारत को पुनः ज्ञान के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित कर रहा है। विशिष्ट अतिथि क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी प्रो. अश्विनी कुमार मिश्रा ने कहा कि छात्राओं के साथ-साथ उनके माता-पिता को मंच पर सम्मानित करने की यह पहल अत्यंत सराहनीय है, जिससे समाज और अन्य छात्राओं को आगे बढ़ने की नई प्रेरणा मिलेगी।

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