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मुख्यमंत्री मान का किला ध्वस्त

चंडीगढ़। पंजाब की संगरूर लोकसभा सीट पर उपचुनाव में सत्ता पक्ष आप पार्टी को हार का सामना करना पड़ा है। वहीं शुरू से ही मुद्दों को लेकर मुखर दिख रही शिरोमणि अकाली दल (अमृतसर) के उम्मीदवार सिमरनजीत सिंह मान को जीत मिली है। सिमरनजीत सिंह ने आप पार्टी के गुरमेल सिंह को सात हजार वोटों के अंतर से हरा दिया है। सिमरनजीत सिंह मान को कुल 253154 वोट मिले हैं। कांग्रेस और अकाली दल समेत कई राजनीतिक दलों का सूपड़ा साफ कर पंजाब की सत्ता पर काबिज होने वाली आप सरकार ने जिस तरह से विधानसभा चुनावों में सफलता हासिल कर राज्य में सरकार बनाई थी। इसे देखकर यह माना जा रहा था कि पूर्व में भगवंत मान की रही इस लोकसभा सीट पर आप पार्टी बड़े आराम से अपनी सीट निकाल लेगी। लेकिन शिरोमणि अकाली दल अमृतसर के उम्मीदवार सिमरनजीत सिंह ने संगरूर सीट पर जीत हासिल कर आप सरकार की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। सिमरनजीत सिंह मान दो बार के सांसद और पूर्व आईपीएस अधिकारी रह चुके हैं। साल 1984 में प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद दिल्ली में हुए सिख विरोधी दंगों के विरोध में सिमरन जीत सिंह मान ने नौकरी से त्याग पत्र दे दिया था।
मशहूर पंजाबी सिंगर सिद्धू मूसेवाला की हत्या ने आप के नेतृत्व वाली मान सरकार पर बड़े सवाल खड़े कर दिये। दरअसल सिद्धू मूसेवाला की बीती 29 मई को गोली मारकर मनसा गांव में हत्या कर दी गई थी। जिसके बाद आप सरकार पर देश भर से सवाल खड़े हुए थे। इसके पीछे की वजह यह कि हत्या से ठीक पहले ही पंजाब सरकार ने करीब 250 लोगों की सुरक्षा हटाई थी, जिसमें मूसेवाला भी शामिल थे। जिसके बाद हत्यारों ने पंजाबी गायक की हत्या को अंजाम दिया था। हालांकि पंजाब और दिल्ली पुलिस मूसेवाला हत्याकांड की जांच कर रही हैं और अब तक इसको लेकर कई गिरफ्तारियां भी की जा चुकी हैं।
शिअद (अमृतसर) ने सिख कैदियों का मुद्दा उठाया और उम्रकैद की सजा पूरी होने के बाद जेलों में बंद लोगों को रिहा करने की मांग की। दरअसल संगरूर लोकसभा क्षेत्र में 15,69,240 पात्र मतदाता हैं। इनमें 8,30,056 पुरुष, 7,39,140 महिलाएं, जबकि 44 ट्रांसजेंडर हैं। वहीं संगरूर लोकसभा सीट पर कुल 16 उम्मीदवार मैदान में थे। जिनमें 13 पुरुष और तीन महिलाएं थीं।
कानून-व्यवस्था के अलावा विपक्ष वादे पूरे न करने को लेकर भी आप सरकार पर खासा हावी दिखा। कांग्रेस की पंजाब इकाई के अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने आप पर करारा हमला बोलते हुए जनता से कहा था कि संगरूर उपचुनाव राज्य में आप के लिए एक चेतावनी होगा। साथ ही कहा था कि आप सरकार पंजाब के लोगों को हल्के में नहीं ले सकती। कांग्रेस कंडिडेट गोल्डी ने प्रचार अभियान के दौरान कहा था कि निर्वाचित होने पर वह संसद में पुरजोर तरीके से लोगों की आवाज उठाएंगे और क्षेत्र के समग्र विकास के लिए काम करेंगे। भाजपा के केवल ढिल्लों ने कहा था कि लोगों ने आप को बड़ा जनादेश दिया, लेकिन पार्टी लोगों को सुशासन देने में विफल रही।
संगरूर लोकसभा सीट पर उपचुनाव में आप की मान सरकार के लिए शुरू से ही चिंता का सबब बने शिअद (अमृतसर) के सिमरजीत सिंह मान को पंजाब की जनता का अच्छा खासा समर्थन मिला, जिसे वो जीत में तब्दील करने में कामयाब रहे। विपक्षी पार्टियों की तरह ही संगरूर लोकसभा सीट पर चुनाव प्रचार के दौरान सिमरनजीत ने भी आप सरकार पर कानून-व्यवस्था को लेकर मुद्दा बनाया। युवाओं में खासे लोकप्रिय रहे पंजाबी सिंगर सिद्धू मूसेवाला की हत्या का मामला उठाने में भी सिमरनजीत आगे दिखे। शिरोमणि अकाली दल बंदी सिखों को मुद्दा बनाकर मतदाताओं को अपने पक्ष में करने की कोशिश करने में पूरी तरह से कामयाब रही। इन्हीं कुछ अहम मुद्दों के चलते सीएम भगवंत मान की रही संगरूर सीट पर आप पार्टी का दावा फिसलता नजर आया। जिससे कि इस सीट पर अपनी विरासत समझ रही आप पार्टी कामयाबी पाने में विफल रही।

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