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कोरोना के बाद इस वायरस ने फैलाई दहशत, नहीं है कोई दवा

नई दिल्ली। चीन से दुनिया भर में फैली कोरोनावायरस महामारी थमने काम नाम नहीं ले रही और विश्व स्वास्थ्य संगठनने एक और खतरनाक वायरस की चेतावनी देकर दुनिया की चिंता बढ़ा दी है. दुनिया में कोरोना कहर के बीच अलग-अलग किस्म की नई बीमारियां लोगों को डरा रही हैं. पश्चिमी अफ्रीकी देशों में नए मारबर्ग वायरस के दो पॉजिटिव मामले मिले हैं. संक्रमण की वजह से इन दोनों लोगों की मौत हो गई है.
पश्चिमी अफ्रीका के घाना में खतरनाक मारबर्ग वायरस से संक्रमित मरीज पाए जाने के बाद अलर्ट पर है. वायरोलॉजी एक्सपर्ट का मानना है कि मारबर्ग वायरस का संक्रमण दूसरे संक्रामक बीमारी इबोला के वायरस से भी अधिक तेजी से फैल सकता है. विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा था कि घाना में दो लोगों के नमूने लिए गए थे. उनमें मारबर्ग वायरस की पुष्टि हुई है. दोनों संक्रमितों की मौत हो गई है.

संगठन ने जोर देकर कहा कि सैंपल के परिणामों की पूरी तरह पुष्टि के लिए सेनेगल के डकार में पाश्चर संस्थान भेजा गया है. यह प्रयोगशाला संयुक्त राष्ट्र स्वास्थ्य एजेंसी के साथ काम करती है. अपने बयान में कहा है कि संभावित खतरे को देखते हुए इस संक्रमण से लडऩे की तैयारी तेजी से की जा रही है. इसके अलावा आगे की जांच भी चल रही है. अगर इस मामले की पुष्टि हो जाती है, तो मारबर्ग संक्रमण पश्चिम अफ्रीका में इबोला संक्रमण के बाद तेजी से बढऩे वाली दूसरी बीमारी होगी. दक्षिणी अशांतीइलाके के दो मरीजों में दस्त, बुखार, जी मिचलाना और उल्टी समेत कई लक्षण पाए गए थे.
इससे पहले बीते साल गिनी में मारबर्ग वायरस के पहले मामले का पता चला था. उसके बाद अभी तक मारबर्गवायरस से संक्रमित कोई दूसरा मामला नहीं मिला है. संस्था के मुताबिक साल 1967 से अब तक मारबर्ग वायरस के दर्जनों मरीज देखे गए हैं. अधिकतर मामले दक्षिणी और पूर्वी अफ्रीका में मिले थे. तब गोला, कांगो, केन्या, दक्षिण अफ्रीका और युगांडा में मारबर्ग के मामले सामने आए थे. मारबर्ग वायरस के स्ट्रेन और केस प्रबंधन के आधार पर पिछली लहर में मृत्यु दर 24 प्रतिशत से 88 प्रतिशत तक थी.
संगठन ने कहा कि यह मारबर्ग संक्रमण वाली बीमारी इबोला के समान एक बेहद संक्रामक रक्तस्रावी बुखार है. यह चमगादड़ों की एक प्रजाति से लोगों में फैलती है. संक्रमित लोगों के शारीरिक द्रवों और सतहों के संपर्क में आने से इसका प्रसार होता है. संक्रमित होने वालो लोगों में बुखार, सिरदर्द जैसे लक्षण हो सकते हैं. संक्रमित होने वाले कुछ मरीजों में 7 दिन के अंदर ब्लीडिंग भी हो सकता है. इसके बाद जान बचाना बेहद मुश्किल हो जाता है. फिलहाल मारबर्ग संक्रमण के लिए कोई वैक्सीन नहीं बनाई गई है.

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