संगीत लोक कला उत्सव कार्यक्रम में लगा, सुर- ताल और खनकती आवाजों का तड़का

Getting your Trinity Audio player ready...

लखनऊ,(मॉडर्न ब्यूरोक्रेसी न्यूज)ः स्वर इंडिया एसोसिएशन लखनऊ की प्रस्तुति “संगीत लोक कला उत्सव” का आयोजन बुधवार को गोमती नगर स्थित अंतरराष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान के ऑडिटोरियम में किया गया। इसमें वरिष्ठ संगीतज्ञ हेम सिंह की परिकल्पना में अंतरराष्ट्रीय स्तर के कलाकारों की नृत्य और गायन की प्रस्तुतियां हुईं। वरिष्ठ कथक गुरु सुरभि सिंह और लोकप्रिय गायिका डॉ. कुसुम वर्मा ने होली और नवरात्र के साथ-साथ, उत्तर प्रदेश की प्रतिष्ठित कथक परंपरा और राजस्थानी-हरियाणवी लोक गायन की मनोरम झांकी भी पेश की। मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित अंतरराष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान के सदस्य, तरुणेश मिश्रा ने दीप प्रज्वलित करके इस उत्सव का विधिवत उद्घाटन किया। इस अवसर पर एसोसिएशन के अध्यक्ष कर्नल हर्षवर्धन गुप्ता, सचिव हेम चन्द्र सिंह, कोषाध्यक्ष स्वरूपा सिंह ने भी दीप प्रज्वलन में सहयोग दिया।

संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार के सहयोग से आयोजित इस संगीत लोक कला उत्सव के पहले चरण में कथक नृत्यांगना और गुरु सुरभि सिंह के दल ने, परंपरा के अनुसार सर्वप्रथम गणपति की वंदना, प्रभावी रूप से कथक नृत्य के माध्यम से पेश की। इसके उपरांत पारंपरिक कथक नृत्य के अंतर्गत दर्शकों ने उपज, उठान, थाट, कवित्व, तीन पल्ली का आनंद लिया। चूंकि फागुन माह चल रहा है इसलिए उसके अनुकूल होली की मनभावन प्रस्तुति ने कार्यक्रम को परवान चढ़ाया। इसमें कलाकारों ने “रंगी सारी गुलाबी चुनरिया” पर सुंदर नृत्य संयोजन पेश किये। कथक नृत्य दल की अंतिम प्रस्तुति सूफी नृत्य रही। कथक नृत्य की प्रस्तुतियों का साथ, विभिन्न साजों पर वरिष्ठ कलाकारों ने दिया। इसमें तबले पर पंडित रविनाथ मिश्रा और बांसुरी पर दीपेन्द्र कुंवर ने संगत दी वहीं सितार वादन नीरज मिश्रा ने किया।

गायन का बृजेन्द्र श्रीवास्तव और पढ़त का दायित्व स्वयं गुरु सुरभि सिंह ने संभाला। इस प्रस्तुति में ईशा रत्न, मीशा रत्न, अंकिता मिश्रा, आकांक्षा पाण्डेय, संगीता कश्यप, अंशिका त्यागी, आरती कुशवाहा ने अपनी नृत्य कला का प्रदर्शन कर तालियां बटोरी। इस साल चौत्र नवरात्रि 30 मार्च से शुरू हो रहे हैं ऐसे में लोकप्रिय लोक गायिका डॉ. कुसुम वर्मा ने अपनी प्रस्तुति की शुरुआत देवी गीत “छुम छुम छाना नाना बाजे मैया पांव पैजनिया” से की। एक ओर जहां उन्होंने राजस्थानी लोकगीत “मरोडिया ल्या जो जी बाजूदार बंगड़ी” सुनाया वहीं दूसरी ओर हरियाणवी लोकगीत “म्हारी री गली में आया रे सपेरा” गाया। अवध के लोकरंगों को संजोते हुए उन्होंने होली गीत “आज बिरज में होरी रे रसिया” और “होली खेले रघुवीरा अवध में” सुनाकर कार्यक्रम में होली की उमंग को जीवंत कर दिया। इसके साथ ही अवधी लोकगीत “जेहि दिन राम जनकपुर आए देखन आयी सब सखियां हाँ सीताराम से भजो”, मैथिली लोकगीत “आजु मिथिला नगरिया निहाल सखिया” भी सुनाया। पूर्विका पाण्डेय और कार्तिका ने गायन में साथ दिया वहीं नृत्य के माध्यम से लोक गीतों के भावों का मनोरम प्रदर्शन अनमोल और शगुन ने किया। संगतकारों के दल में अरविंद वर्मा, शुभम शर्मा और प्रमोद सिंह ने प्रभावी संगत दी।

 

Check Also

Renkli slot deneyimi ve ödüller Bethub ile

Content Bet Hub Giriş ve Hızlı Kayıt İşlemleri Bet Hub Giriş ile Slot Oyunları ve …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *