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लखनऊ,(मॉडर्न ब्यूरोक्रेसी न्यूज)ः राजधानी लखनऊ में गोमती नदी के उफान से बाढ़ ने भयावह रूप ले लिया है, जिसके कारण निचले और रिहायशी इलाकों के 40,000 से अधिक घरों में 5 फीट तक पानी भर गया है और 1 लाख से अधिक की आबादी सीधे तौर पर प्रभावित हुई है। उत्तर प्रदेश की राजधानी में अक्टूबर 2026 में आई यह बाढ़ साल 2008 के बाद, यानी करीब 18 साल बाद देखी गई सबसे विनाशकारी आपदा बनकर उभरी है। हालात इस कदर बिगड़ चुके हैं कि शहर के सुरक्षित माने जाने वाले गोमती नगर विस्तार, फीनिक्स पलासिओ मॉल और इकाना स्टेडियम जैसे वीआईपी इलाकों की सड़कों तक पानी पहुंच गया है। लोग अपनी गृहस्थी बचाने की जद्दोजहद में जुटे हैं, जहां सड़कों पर गाड़ियां तैर रही हैं और आवाजाही के लिए नाव व ट्रैक्टर-ट्रॉली एकमात्र सहारा बन चुके हैं।
लखनऊ का फैजुल्लागंज इलाका इस समय बाढ़ की सबसे भीषण मार झेल रहा है। गोमती नदी की सीमा से सटे इस पूरे क्षेत्र की आधा दर्जन से अधिक कॉलोनियां—जैसे गणेश विहार, दाउदनगर और ममा कॉलोनी—पूरी तरह जलमग्न हो चुकी हैं। ग्राउंड फ्लोर पूरी तरह पानी में डूब चुके हैं, जिसके कारण हजारों लोग अपनी जान और बची-कुची गृहस्थी लेकर छतों पर शरण लेने को मजबूर हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि पानी इतनी तेजी से बढ़ा कि उन्हें संभलने का मौका तक नहीं मिला। रसोईघर से लेकर बेडरूम तक में घुटने से लेकर छाती तक पानी भरा हुआ है। जरूरी राशन, पीने का साफ पानी और दवाइयों की भारी किल्लत हो गई है। कई घरों में बुजुर्ग और बीमार लोग फंसे हुए हैं, जिन्हें सुरक्षित बाहर निकालने के लिए स्थानीय युवा और बचाव दल कड़ी मशक्कत कर रहे हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने रात की पुलिस गश्त बढ़ाने और दाउदनगर में एक अतिरिक्त कंट्रोल रूम स्थापित करने के निर्देश दिए हैं।
बाढ़ प्रभावित इलाकों में जहां कभी गाड़ियां दौड़ती थीं, वहां अब नाव और ट्रैक्टर-ट्रॉलियां चल रही हैं। जिला प्रशासन द्वारा राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) और राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) की नावें तैनात की गई हैं, जो लोगों को राहत शिविरों तक पहुंचा रही हैं। हालाँकि, प्रभावितों की विशाल संख्या को देखते हुए सरकारी इंतजाम कम पड़ रहे हैं, जिसके कारण लोगों ने खुद ‘जुगाड़ की नाव’ और लकड़ी के तख्तों से अस्थायी बेड़े तैयार कर लिए हैं। कई इलाकों में ट्रैक्टर चालकों द्वारा लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए मनमाना किराया वसूलने की भी शिकायतें सामने आ रही हैं। लोग अपने कीमती सामान, घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स और मवेशियों को बचाने के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं। कई परिवार मकानों में ताला लगाकर अपने रिश्तेदारों के घर या होटलों में शरण ले रहे हैं।

इस बार की बाढ़ ने लखनऊ के उन रिहायशी इलाकों को भी अपनी चपेट में ले लिया है, जिन्हें पूरी तरह सुरक्षित माना जाता था। गोमती नगर विस्तार के सेक्टर 7 और रिवर ग्रीन एन्क्लेव जैसी पॉश सोसायटियों के 20 से अधिक घरों में नदी का पानी घुस गया है। फीनिक्स पलासिओ मॉल के चारों तरफ की सड़कें और सर्विस लेन पूरी तरह जलमग्न हो चुकी हैं, जिससे यह क्षेत्र एक द्वीप की तरह नजर आने लगा है। भारत रत्न श्री अटल बिहारी वाजपेयी इकाना क्रिकेट स्टेडियम के पास की मुख्य सड़कों पर 2 फीट तक पानी भर गया है। वहीं, स्थानीय आईटी (IIIT) परिसर के अंदर 1 फीट तक पानी भरने के कारण कक्षाएं और परीक्षाएं स्थगित करनी पड़ी हैं। गोमती नदी के किनारे स्थित 65 एकड़ में फैला राष्ट्रीय प्रेरणा स्थल, रिवरफ्रंट और नौसेना शौर्य वाटिका पूरी तरह से जलमग्न हैं, जिन्हें एहतियातन पर्यटकों के लिए बंद कर दिया गया है।
सिंचाई विभाग के अनुसार, यह स्थिति लखनऊ में स्थानीय बारिश के कारण नहीं, बल्कि गोमती नदी के उद्गम स्थल पीलीभीत और ऊपरी इलाकों में हुई मूसलाधार बारिश के बाद वहां से छोड़े गए भारी जलप्रवाह के कारण पैदा हुई है। बाढ़ की भयावहता को देखते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने फैजुल्लागंज से लेकर नैमिषारण्य तक के प्रभावित क्षेत्रों का हवाई और जमीनी सर्वेक्षण किया है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को युद्धस्तर पर राहत कार्य चलाने, प्रभावितों को भोजन के पैकेट, तिरपाल और दवाइयां मुहैया कराने के सख्त निर्देश दिए हैं। लखनऊ के जिलाधिकारी विशाख जी. और संयुक्त पुलिस आयुक्त बबलू कुमार स्वयं घुटनों तक पानी में उतरकर नावों के जरिए बरावन कला, सैथा और जेहटा जैसे ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों का जायजा ले रहे हैं। प्रशासन ने गर्भवती महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को प्राथमिकता के आधार पर सुरक्षित स्थानों पर भेजने के लिए 10 अतिरिक्त नावों की व्यवस्था की है। इसके साथ ही, जलभराव वाले क्षेत्रों में बीमारियां न फैलें, इसके लिए लखनऊ नगर निगम ने लगभग 250 कर्मचारियों और ड्रोनों की मदद से बड़े पैमाने पर स्वच्छता व एंटी-लार्वा छिड़काव अभियान शुरू किया है।
राहत शिविरों और सरकारी दावों के बीच जमीनी स्तर पर जनता का आक्रोश भी फूट रहा है। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि बाढ़ प्रभावित कॉलोनियों में कई जगहों पर प्रशासनिक मदद समय पर नहीं पहुंच रही है। गोमती नगर विस्तार के निवासियों का कहना है कि उन्होंने करोड़ों रुपये खर्च करके सुनियोजित बुनियादी ढांचे की उम्मीद में संपत्तियां खरीदी थीं, लेकिन पहली बड़ी आपदा में ही जल निकासी व्यवस्था पूरी तरह फेल हो गई। विशेषज्ञों का भी मानना है कि गोमती के डूब क्षेत्र (Floodplain) में हुए अवैध निर्माण और अनियोजित शहरीकरण के कारण नदी का प्राकृतिक प्रवाह बाधित हुआ है, जिससे पानी नए रिहायशी इलाकों में दाखिल हो रहा है। फिलहाल, सिंचाई विभाग और लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) ने नदी के पानी को शहर में घुसने से रोकने के लिए मिट्टी और पत्थरों के अस्थायी बांध बनाए हैं और पानी निकालने के लिए 26 से अधिक भारी पंपिंग सेट तैनात किए हैं। प्रशासन को उम्मीद है कि आने वाले 24 से 48 घंटों में जलस्तर में गिरावट आने के बाद स्थिति नियंत्रण में आ सकेगी।
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