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एयरपोर्ट पर पुलिस का जाल: फ्लाइट में घुसी पुलिस

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लखनऊ/दिल्ली,(मॉडर्न ब्यूरोक्रेसी न्यूज)ः  शनिवार की सुबह दिल्ली का इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा (IGI) एक सामान्य एयरपोर्ट से बदलकर किसी हाई-प्रोफाइल क्राइम थ्रिलर के सीन जैसा नजर आने लगा। सीजेपी (CJP) के ‘दिल्ली चलो’ मार्च को विफल करने के लिए दिल्ली पुलिस ने जो रणनीति बनाई थी, उसका सबसे बड़ा और पहला प्रहार एयरपोर्ट के रनवे पर हुआ, जहां इंडिगो की एक फ्लाइट के लैंड होते ही देश के प्रमुख युवा कार्यकर्ताओं को विमान के भीतर ही हिरासत में ले लिया गया।
इस नाटकीय कार्रवाई की भूमिका तड़के सुबह से ही सोशल मीडिया पर लिखी जाने लगी थी। सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके को पहले से इस बात का आभास था कि प्रशासन उन्हें जंतर-मंतर तक नहीं पहुंचने देगा। उड़ान भरने से कुछ घंटे पहले ही दिपके ने प्रधानमंत्री को टैग करते हुए एक्स (X) पर एक बेहद आक्रामक पोस्ट किया। उन्होंने लिखा, “आपकी धमकियां और पुलिसिया तंत्र देश के युवाओं को डरा नहीं सकते। अगर लोकतांत्रिक अधिकारों की मांग करने के बदले आप हमें जेल में डालना चाहते हैं, या हमें गोली भी मारना चाहते हैं, तो हम हर अंजाम भुगतने के लिए तैयार हैं।”
असली हाई-वोल्टेज ड्रामा तब शुरू हुआ जब सुबह विमान दिल्ली एयरपोर्ट के रनवे पर उतरा। विमान अभी पूरी तरह रुका भी नहीं था कि दिल्ली पुलिस की एक विशेष टीम और महिला सुरक्षाकर्मी सीधे फ्लाइट के भीतर दाखिल हो गईं। पुलिस को अंदर आते देख अभिजीत दिपके ने बिना समय गंवाए अपने मोबाइल फोन से इंस्टाग्राम लाइव शुरू कर दिया। देखते ही देखते लाखों लोग उस लाइव स्ट्रीमिंग से जुड़ गए और विमान के भीतर का नजारा पूरे देश के सामने आ गया।
वीडियो में साफ देखा जा सकता था कि पुलिसकर्मी अभिजीत दिपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को तुरंत फ्लाइट से नीचे उतरने और साथ चलने के लिए कह रहे थे। इस दौरान नेताओं और पुलिस अधिकारियों के बीच तीखी बहस हुई। दिपके ने लाइव वीडियो में पुलिस से कहा, “अगर आपके पास वारंट है, तो हम सहयोग करेंगे। आप हमारे विमान से बाहर आने का इंतजार कर सकते थे, लेकिन रनवे पर इस तरह विमान के अंदर घुसना आपकी घबराहट को दिखाता है। खैर, हम गांधी के रास्ते पर चलने वाले लोग हैं, हम आपकी लाठियों और जेल से नहीं डरते।”
नेताओं को फ्लाइट के पिछले दरवाजे से सीधे पुलिस के वाहनों में बैठाकर अज्ञात स्थान पर ले जाया गया। हिरासत में लिए जाने के ठीक बाद सीजेपी के आधिकारिक हैंडल से एक प्रेस विज्ञप्ति जारी की गई, जिसमें इस कार्रवाई को “अघोषित आपातकाल” और देश के इतिहास का एक काला दिन बताया गया। बयान में कहा गया कि जब सत्ता शांतिपूर्ण असहमति की आवाज को दबाने के लिए सामूहिक गिरफ्तारियों का सहारा लेने लगे, तो समझ लेना चाहिए कि आंदोलन सफल हो चुका है। इस हाई-प्रोफाइल हिरासत ने जंतर-मंतर की आग को और भड़का दिया है।

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