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जिसके घर छापे में मिला 1 करोड़ 65 लाख कैश, दर्ज है 99 एफआईआर, ऐसा प्रेमचंद कैसे बना ईसाई धर्म गुरु,

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नई दिल्ली। मध्य प्रदेश में ईओडब्लू द्वारा भ्रष्ट अधिकारियों पर शिकंजा कसने का अभियान लगातार जारी है. जहां जबलपुर जिले में बीते 2 महीनें में ईओडब्ल ने पांच कार्रवाई की है. इससे पहले आरटीओ संतोष पॉल के बाद अब ईसाई धर्म गुरु पी सी सिंह के ठिकानों पर छापा मारा गया. जहां दिन भर चली कार्रवाई के बाद ईओडब्ल ने एक खुलासा किया है. ईसाई धर्म गुरु के पास से ईओडब्ल को जांच में 1 करोड 65 लाख रुपए कैश एवं 18 हजार डॉलर विदेशी मुद्रा सहित 90 लाख रुपए की लक्जरी कार सहित 9 कार, एवं दो किलो सोना और विजय नगर मे काली कमाई से खुद का स्कूल भी बनाया है. साथ ही आफिस से संस्थाओं के दस्तावेजों के अतिरिक्त कुल 17 सम्पत्तियों के दस्तावेज, 48 बैंक खातों की जानकारी भी मिली है, जिसके बाद बैंकों से डिटेल निकाली जा रही है.कब और कितना पैसा कहां से आया और गया है. फिलहाल पीसी सिंह जर्मनी में है.
दरअसल, फर्जी दस्तावेजों से संस्था का चेयरमैन बनकर करोड़ों की रकम की हेराफेरी करने वाले जबलपुर के द बोर्ड ऑफ एजुकेशन चर्च ऑफ नार्थ इंडिया के चेयरमैन ईसाई धर्म गुरु पीसी सिंह के घर पर टीम ने छापा मारा था. इस एक्शन के दौरान एसआई विशाखा तिवारी जो कि केस में विवेचना के दौरान महत्वपूर्ण दस्तावेजों एवं गबन की राशि से अर्जित संपत्तियों की जानकारी जुटाने के लिए कोर्ट से विधिवत सर्च वारंट मिल गया है, जिसमे ईसाई धर्म गुरु के खिलाफ दो करोड़ 70 लाख रुपए की राशि धार्मिक संस्थाओं में ट्रांसफर करने और खुद के इस्तेमाल करने की शिकायतें मिली थी.
वहीं, शिकायत पर आज 8 सितंबर को सुबह ईसाई धर्म गुरु पी.सी. सिंह के घर बिशप हाउस नेपियर टाउन जबलपुर एवं कार्यालय नेपियर टाउन में कार्यवाही करने पहुंची. जहां कार्यवाही के दौरान आर्थिक अपराध ब्यूरो की छापेमारी में ईसाई धर्म गुरु के घर से विदेशी मुद्रा सहित बड़ी मात्रा में कैश की बरामदी की.जिसे गिनने के लिए स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की टीम मशीन लेकर बिशप के घर पहुंची है. जहां दस्तावेजों की पड़ताल से लेकर नोटों के गिनने का काम शुरू किया गया.

बता दें कि, आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ की छापेमारी के बाद सुर्खियों में आए द बोर्ड ऑफ एजुकेशन चर्च ऑफ नार्थ इंडिया के चेयरमैन ईसाई धर्म गुरु पीसी सिंह उर्फ प्रेमचंद सिंह के खिलाफ देश के अलग-अलग राज्यों में दिल्ली में तीन, यूपी में 42, राजस्थान में 24, झारखंड में तीन, मध्यप्रदेश में चार, छत्तीसगढ़ में तीन, महाराष्ट्र में 11, पंजाब में छह, पश्चिम बंगाल में एक, हरियाणा में एक सहित अन्य चार मिलाकर करीब 99 आपराधिक केस दर्ज हैं, जिनमें से ज्यादातर मामले छेड़छाड़, अवैध वसूली, फर्जी दस्तावेज बनाने सहित अन्य केस भी शामिल हैं. साथ ही यह भी आरोप लगाए गए थे कि ईसाई धर्म गुरु पीसी सिंह ने अपने सहयोगी पीटर बलदेव से मिलीभगत कर मिर्जापुर में 10 करोड़ रुपए की कीमती जमीन बेच दी थी.
गौरतलब हैं कि, कुछ समय पहले प्रिंसिपल क्राइस्ट चर्च कालेज, हजरतगंज लखनऊ राकेश कुमार चत्री ने इस संबंध में थाना हजरतगंज को शिकायती पत्र भी सौंपा था. जिसमें बताया गया है कि पीटर बलदेव पूर्व में ईसाई धर्म गुरु था. उसके खिलाफ के आपराधिक मुकदमें दर्ज हुए तो तत्कालीन चर्च आफ नार्थ इंडिया के पदाधिकारियों ने पीटर बलदेव को ईसाई धर्म गुरु पद से हटा दिया था. इसके बाद पीसी सिंह ईसाई धर्म गुरु बना. पीसी सिंह ने पीटर बलदेव से मिर्जापुर की जमीन बिकवा दी और बलदेव ने जमीन बेचकर 5 करोड़ रूपए ईसाई धर्म गुरु पीसी सिंह को पहुंचा दिए. इसके बाद पीसी सिंह ने उसे ईसाई धर्म गुरु पद पर बहाल कर दिया था. इसी शिकायत में ईसाई धर्म गुरु पीसी सिंह के खिलाफ देश के कई राज्यों में दर्ज एफआइआर की भी जानकारी दी गई थी. साथ ही यह मांग भी की गई थी कि पीसी सिंह द्वारा अवैध तरीके से अर्जित की गई अरबों की संपत्ति को जब्त की जाए. इसके अलावा ईसाई धर्म गुरु पीसी सिंह ने खुद को संस्था का चेयरमैन बताने के लिए दस्तावेजों में हेराफेरी की है. इस पूरे मामले में फर्म एंड सोसायटी के अधिकारी भी एजेंसी के निशाने पर हैं.

जानिए ईसाई धर्म गुरु के यहां क्या-क्या मिला?

1 करोड़ 65 लाख रुपए कैश
करीब 18 हजार विदेशी मुद्रा
32 इंपॉर्टेंट हाथ की घड़ी
2 किलो सोना, कीमत करीब 90 लाख रुपए
9 लग्जरी कार
90 लाख की डिस्कवरी कार भी मिली
विजय नगर में स्कूल के नाम से ली जमीन
काली कमाई से खुद का स्कूल भी बनाया
शिक्षकों की सैलरी से भी लेता था कटअप
स्कूल के नाम पर मिली जमीन का कमर्शियल इस्तेमाल होता था.
17 सम्पत्तियों के दस्तावेज
48 बैंक खातों की जानकारी

कौंन है ईसाई धर्म गुरु पीसी सिंह?

बता दें कि, ईसाई धर्म गुरु पीसी सिंह मूल रूप से बिहार में समस्तीपुर जिले के चंदसुररी गांव का रहने वाला है. उसकी शादी नोरा सिंह से हुई थी. वहीं, पीसी सिंह को 8 अप्रैल 1988 को क्राइस्ट चर्च कैथेड्रल, जबलपुर में एक डीकन के रूप में नियुक्त किया गया था. इसके बाद 10 अप्रैल 1990 को सेंट आगस्टीन चर्च बिलासपुर में एक प्रेस्बिटर के रूप में नियुक्त किया. साल 1995-1999 तक चेस्ट चर्च आफ क्राइस्ट, सीएनआई जबलपुर का प्रेस्बिटर प्रभारी रहा. साल 1999-2004 तक सेंट पॉल चर्च, घमापुर के प्रेस्बिटर प्रभारी रहा. साथ ही 13 अप्रैल 2004 को जबलपुर के सूबा के चौथे बिशप के रूप में चुना गया था. इसके अलावा 25 अप्रैल 2004 को क्राइस्ट चर्च कैथेड्रल सीएनआई, जबलपुर में बिशप बनाया गया था.
इस मामले में ईओडब्ल एसपी देवेंद्र प्रताप सिंह ने बताया की जांच में शैक्षणिक संस्थाओं से साल 2004-05 से साल 2011-12 के बीच लगभग 2 करोड़ 70 लाख रुपए की राशि धार्मिक संस्थाओं को ट्रांसफर करने के मामले सामने आए हैं. वहीं,जांच में आए सबूतों के आधार पर आरोपी ईसाई धर्म गुरु पीसी सिंह, बीएस सोलंकी, तत्कालीन असिस्टेंट रजिस्ट्रार फर्म एण्ड संस्थाएं, जबलपुर के खिलाफ धारा 406, 420, 468, 471, 120 बी के तहत केस दर्ज कर विवेचना की जा रही है.
वहीं, इस कार्रवाई को लेकर अब सियासी उठा पटक भी शुरू हो गई है. इस दौरान ईसाई धर्म गुरु को लेकर बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने मिशनरी संस्थाओं की जांच की मांग कर दी है. शर्मा ने कहा कि प्रदेश में कई जगह इस तरह गतिविधियों को अंजाम दिया जा रहा है. जमीन किस उद्देश्य से दी गई इसकी जांच होनी चाहिए. जबलपुर के अलावा प्रदेश में कई जगह ऐसे केस है. जहां स्कूलों के नाम पर दी गई जमीन बेचीं तो नहीं जा रही. इसकी भी जांच होना चाहिए. वहीं, विधायक रामेश्वर शर्मा ने बयान देते हुए कहा कि इन पैसों का इस्तेमाल धर्मांतरण के लिए तो नहीं किया जा रहा था. सरकार इसकी जांच करें. साथ ही यह आरोप लगाया है कि लालच देकर गरीबों को धर्मांतरण के लिए प्रेरित किया जाता है. ये पैसों का उपयोग कहां होने वाला था सरकार को इसकी कड़ी जांच करनी चाहिए. वहीं, पूरे मामले में कांग्रेस के पूर्व मंत्री पी सी शर्मा का कहना है कि सरकार का काम मदरसा मिशनरी पर छापा मारकर नफरत फैलाना है.

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