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शिक्षा के साथ बच्चों की प्रतिभा को भी निखारता है बाल निकुंज कॉलेज: एचएन जायसवाल

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लखनऊ। स्कूल मात्र एक परिसर नहीं है जहां पर किसी भी बच्चे को शिक्षित किया जाता है, बल्कि स्कूल वो जगह जहां पर बच्चों में छिपी प्रतिभा को निखारने का काम उनके शिक्षक व अध्यापक करते हैं। बदलते दौर में आज शिक्षा का पैटर्न काफी बदल गया है, इसके साथ ही विद्यालयों और शिक्षिकों की जिम्मेदारियां भी पहले से कहीं अधिक हो गईं हैं। प्रतिस्पर्धा के इस युग में एक ओर जहां शिक्षिक बच्चों को भविष्य में आने वाले चुनौतियों का मुकाबला करने के लिए तैयार करते हैं तो वहीं दूसरी ओर वह बच्चों में छिपी प्रतिभा को निखारने के लिए भी अपने छात्रों और छात्राओं की मॉनिटरिंग करते है। इसके सकारात्मक परिणाम भी सामने आते हैं। क्योंकि अधिकांशत: ऐसा देखने को मिलता है कि माता-पिता भी अपने बच्चे में छिपी जिस प्रतिभा को नहीं देख पाते हैं, उसी प्रतिभा को बच्चे के शिक्षक पल झपकते ही जान लेते हैं। ये कोई किस्सागोई नहीं है बल्कि हकीकत है। हजारों की संख्या में बच्चों के बीच में कुछ ऐसे चुनिन्दा बच्चों की प्रतिभा को सामने लाने का काम कर रहा है राजधानी का बाल निकुंज इंटर कॉलेज…
सूबे की राजधानी के ट्रांसगोमती क्षेत्र में बाल निकुंज इंटर कॉलेज की गिनती राजधानी के नामचीन स्कूलों में होती है। इस विद्यालय के पांच शाखाओं में पांच हजार से भी अधिक बच्चे मौजूदा दौर में शिक्षा पा रहे हैं। इस विद्यालय मडिय़ांव स्थित गल्र्स विंग में कुछ ऐसी प्रतिभावान छात्राएं हैं, जिनकी कलात्मकता के विषय में कुछ कहना सूरज को दिया दिखाने जैसा है। बीते दिनों इस विद्यालय की छात्राएं ने जब रंग और ब्रश उठाकर वस्त्रों पर अपनी कल्पनाशीलता को यथार्थ का रूप दिया तो देखने वाले देखते ही रह गए। कक्षा नौ से लेकर इंटर फस्र्ट ईयर की इन छात्राओं की कलाकारी को देखकर हर कोई हैरान रह गया। जिस तरह से इन बच्चों ने विभिन्न तरह के कपड़ों पर साधारण रंगों से असाधारण कलाकारी की वह तारीफ के काबिल है। इन बच्चों ने कपड़ों पर बेहद मनमोहक डिजाइनें बनाकर सभी का मनमोह लिया।
इस विषय में जब स्कूल के एमडी एचएन जायसवाल से बात की गई तो उन्होंने कहा कि प्रत्येक बच्चे में कोई न कोई प्रतिभा अवश्य होती है और हमारी कोशिश यही होती है कि बच्चे का जिस भी फील्ड में रुझान हो उसको उसी ओर अग्रसर किया जाए और लगातार इस दिशा में लक्ष्य निर्धारित करते हुए उनको प्रोत्साहित किया जाए। इसी क्रम में हमारे विद्यालय की गल्र्स विंग में कुछ ऐसी चुनिंदा छात्राएं अध्यापिका प्रीति त्रिवेदी की नजर में आईं जिनका रुझान कला के क्षेत्र में अधिक है।

तो अध्यापिका प्रीति त्रिवेदी ने इन बच्चों को अलग-अलग तरह के टॉस्क दिए, जिनको इन बच्चों ने खूब मन लगाकर पूरा किया। उनकी उकेरी हुए कृतियों को देखकर ऐसा लगता है कि मानो किसी कलाकार ने बहुत बेहतर ढंग से अपनी भावनाओं को रंगों के माध्यम से व्यक्त किया है। श्री जायसवाल आगे कहते हैं कि हमारी बच्चियों ने ऐसा काम किया है जिसने सबका मनमोह लिया है। बच्चों की इस प्रतिभा को देखते हुए जल्द ही स्कूल प्रशासन एक प्रदर्शनी का आयोजन करने की तैयारी कर रहा है। जिसमें ऐसे बच्चों की बनाई हुई कृतियों से सिर्फ शहर को ही प्रदेश और देश के लोगों को अवगत कराया जाएगा। हमारा मकसद इन बच्चों का प्रोत्साहन करने के साथ-साथ उनकी प्रतिभा को उचित प्लेटफार्म भी मुहैया करना है।

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