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लखनऊ,(मॉडर्न ब्यूरोक्रेसी न्यूज)ः मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन तथा संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह के दूरदर्शी नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा संस्कृति, इतिहास और पुरातत्व के संरक्षण एवं संवर्धन की दिशा में सतत प्रयास किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में संस्कृति विभाग उत्तर प्रदेश के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रीय पुरातत्व इकाई, वाराणसी, उ०प्र० राज्य पुरातत्व विभाग, लखनऊ एवं वसंत कन्या महाविद्यालय, कमच्छा के प्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग के संयुक्त तत्वावधान में महाविद्यालय परिसर में 6 दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का शुभारंभ किया गया।
इस कार्यशाला का विषय “मानव का उद्भवरू मानव, समायोजन तथा तकनीक” था, जिसने वर्तमान कृत्रिम बुद्धिमत्ता के युग में प्रतिभागियों के बीच विशेष जिज्ञासा एवं रुचि उत्पन्न की। उद्घाटन सत्र में महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो० रचना श्रीवास्तव ने अतिथियों का स्वागत करते हुए प्राचीन भारतीय इतिहास विभाग को इस सार्थक विषय पर कार्यशाला आयोजित करने हेतु बधाई दी। उन्होंने कहा कि मानव विकास की यात्रा को समझने के लिए आवश्यक है कि हम प्रकृति और समाज पर मानवीय निर्भरता का पुनर्विचार करें तथा धारणीय भविष्य के निर्माण की दिशा में ठोस पहल करें। कार्यशाला की संयोजक एवं प्रख्यात पुराविद प्रो० विदुला जायसवाल ने कार्यशाला की रूपरेखा तथा विषय की प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में मानव उद्विकास की प्रयोगात्मक समझ विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया। इस अवसर पर पुरातत्व विभाग द्वारा छायाचित्र प्रदर्शनी लगाई गई। इस कार्यशाला का विषय “मानव का उद्भवरू मानव, समायोजन तथा तकनीक” रहा, जिसने वर्तमान कृत्रिम बुद्धिमत्ता के युग में प्रतिभागियों के बीच विशेष जिज्ञासा एवं उत्साह उत्पन्न किया। कार्यशाला का उद्देश्य मानव विकास की प्रक्रिया, तकनीकी नवाचारों तथा सामाजिक समायोजन के परस्पर संबंधों को समझना रहा। उत्तर प्रदेश के सांस्कृतिक उन्नयन में संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह का विशेष प्रोत्साहन एवं ध्यान रहता है। वे बताते हैं कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश सांस्कृतिक पुनर्जागरण के युग से गुजर रहा है। राज्य पुरातत्व विभाग द्वारा आयोजित ऐसे कार्यक्रम हमारी जड़ों से जुड़ने और आधुनिक विज्ञान से तालमेल बैठाने का मार्ग प्रशस्त करते हैं।” उन्होंने कहा कि विभाग का उद्देश्य न केवल अतीत की विरासत को सहेजना है, बल्कि उसे भविष्य की पीढ़ियों के लिए प्रेरणा-स्रोत बनाना भी है।
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