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राजस्थान में सबकुछ नहीं है ऑल इज वेल

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जयपुर। राजस्थान की गहलोत सरकार में इन दिनों ऑल इज वेल नहीं है. राज्य में अगले साल के आखिर में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले कई कांग्रेस विधायकों की नाराजगी खुलकर सामने आई है. वहीं अफसरशाही और मंत्रियों के कामकाज को लेकर भी कई कांग्रेस विधायक खफा चल रहे हैं. हाल में कई विधायकों ने सूबे के मुखिया अशोक गहलोत के सामने जनता से जुड़े विभागों में काम करने के तौर तरीकों, मंत्रियों के बर्ताव और लंबित मुद्दों पर अपनी शिकायत रखी है. वहीं बसपा से कांग्रेस में आए विधायक भी गहलोत सरकार के खिलाफ लामबंद हो रहे हैं. बताया जा रहा है कि राजस्थान में सत्ताधारी कांग्रेस का हर तीसरा विधायक मंत्रियों के व्यवहार और ब्यूरोक्रेसी के कामकाज से नाराज चल रहा है लेकिन चुनावी साल से आखिर क्यों विधायकों-मंत्रियों की खुले तौर पर नाराजगी सामने आ रही है यह सवाल सीएम गहलोत की चिंता बढ़ा रहा है. वहीं कई विधायक मंत्रिमंडल में जगह और राजनीतिक आयोगों में नियुक्ति को लेकर भी मोर्चा खोल चुके हैं.
बता दें कि विधायकों में सबसे ज्यादा नाराजगी मंत्रियों के कामकाज को लेकर बताई जा रही है. इसके साथ ही काफी संख्या में विधायक ब्यूरोक्रेसी के रवैये से नाराज चल रहे हैं. वहीं कुछ विधायक अपने विधानसभा क्षेत्र में अटके कामों को लेकर नाराजगी के सुर दिखा रहे हैं.
गहलोत सरकार में बसपा से कांग्रेस में आए विधायकों की सरकार के प्रति लगातार नाराजगी देखी जा रही है जिसके बाद अब कुछ विधायकों ने दिल्ली कूच किया है. जानकारी के मुताबिक बसपा से कांग्रेस में शामिल हुए 6 विधायकों में से राजेंद्र गुढ़ा, लाखन सिंह मीणा, और संदीप यादव ने दिल्ली में डेरा डाल दिया है जहां वह कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात कर सकते हैं.
विधायकों का कहना है कि उन्हें कांग्रेस आलाकमान से मिलवाने का किया गया वादा पूरा नहीं किया गया है. वहीं कांग्रेस में आने के 2 साल बाद भी उन सभी को पद नहीं मिला है. इसके अलावा 2020 में सियासी संकट में गहलोत सरकार का साथ देने के बावजूद अब उन्हें अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर डर सता रहा है.
राज्य मंत्री राजेद्र गुढ़ा ने हाल में कहा था कि मंत्री पद और राजनीतिक नियुक्तियों को लेकर आलाकमान से बात तक नहीं की गई है. गुढ़ा ने कहा कि हमारे साथियों के बीच अब अविश्वास बढ़ता जा रहा है और हम सभी वादे पूरे नहीं होने को लेकर चिंतित भी है. उन्होंने कहा कि अगर सरकार आने वाले समय में वादे पूरे नहीं करती है तो फिर हमें कांग्रेस सरकार को दिए गए समर्थन को लेकर आगे फिर सोचना पड़ेगा.
वहीं विधायक वाजिब अली ने गहलोत सरकार के मंत्रियों के खिलाफ नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि बीडी कल्ला के शिक्षा विभाग में काम नहीं हो रहे है. उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षा विभाग में कई तरह की समस्याएं चल रही है. विधायक ने आरोप लगाया कि हमारे विधानसभा क्षेत्रों को अनदेखा किया जा रहा है.
वहीं ब्यूरोक्रेसी को लेकर भी काफी विधायकों ने नाराजगी जाहिर की है. हाल में पायलट खेमे से आने वाले विधायक वेदप्रकाश सोलंकी ने कहा कि राजस्थान में पुलिस और ब्यूरोक्रेसी सही तरीके से काम नहीं कर रही है. विधायक ने पुलिस पर बजरी माफियाओं से मिलीभगत का भी आरोप लगाया.
वहीं पीपल्दा विधायक रामनारायण मीणा ने कहा कि राज्य में कैबिनेट होने के बावजूद अकेले मुख्यमंत्री प्रदेश का भार ढो रहे हैं औऱ मंत्रियों को जनता की समस्या से कोई राब्ता नहीं है. वहीं कुछ समय पहले सरकार में मंत्री अशोक चांदना भी ब्यूरोक्रेसी पर गंभीर सवाल खड़े कर चुके हैं, यहां कि चांदना ने अपने इस्तीफे तक की पेशकश कर दी थी.
गौरतलब है कि राजस्थान में विधानसभा चुनावों में अब महज डेढ़ साल का समय बचा है ऐसे में जनता के रूके काम करने के लिए विधायकों के पास 11 महीने रहे हैं ऐसे में विधायक चाहते हैं कि बजट से पहले जितनी तेजी से जनता के धरातल पर काम हो जाएं तो उसका उन्हें जमीन पर फायदा मिले.

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