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तीस्ता सीतलवाड़ को राहत, सुप्रीम कोर्ट ने सबरंग ट्रस्ट मामले में जमानत बरकरार रखी

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नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को गुजरात सरकार की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें तीस्ता सीतलवाड़ और उनके पति जावेद आनंद को उनके एनजीओ सबरंग ट्रस्ट से संबंधित 1.4 करोड़ रुपये के कथित फंड गबन मामले में अग्रिम जमानत देने को चुनौती दी गई थी। न्यायमूर्ति एसके कौल की अध्यक्षता वाली तीन-न्यायाधीशों की पीठ ने सीतलवाड और उनके पति को मामले के संबंध में गुजरात पुलिस के साथ सहयोग करने के लिए भी कहा। अदालत अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू की उस दलील का जवाब दे रही थी जिसमें आरोप लगाया गया था कि दोनों जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं।
न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया और पीके मिश्रा की पीठ ने कहा कि चार्जशीट अभी तक दायर नहीं की गई है। एएसजी का मानना है कि सहयोग की कमी का एक तत्व है। जैसा भी हो, उत्तरदाता जांच में सहयोग करेंगे और जब आवश्यक हो। गुजरात की ओर से की गई टिप्पणियों का जिक्र करते हुए पीठ ने आगे कहा कि यह कहना बेतुका है कि जमानत के चरण में की गई कोई भी टिप्पणी मामले की सुनवाई पर शायद ही कोई प्रभाव डाल सकती है। हमें और कुछ कहने की जरूरत नहीं है। उच्च न्यायालय ने 8 फरवरी, 2019 के अपने फैसले में तीस्ता को अग्रिम जमानत दे दी। धन की कथित हेराफेरी का मामला अहमदाबाद अपराध शाखा ने एक शिकायत पर दर्ज किया था, जिसमें सीतलवाड और आनंद पर 2008 और 2013 के बीच अपने एनजीओ सबरंग ट्रस्ट के माध्यम से केंद्र सरकार से धोखाधड़ी से 1.4 करोड़ रुपये का अनुदान हासिल करने का आरोप लगाया गया था।

 

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