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आखिर क्यों बदले मायावती के सुर

लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) प्रमुख मायावती अचानक भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के खिलाफ आक्रामक हो रही हैं. हालही में उन्होंने कई अलग-अलग मुद्दों पर बीजेपी के खिलाफ जोरदार हमला बोला है. मायावती ने तेलंगाना के बीजेपी विधायक टी राजा के पैगंबर मोहम्मद पर दिए आपत्तिजनक बयान को लेकर बीजेपी पर निशाना साधा है. मंगलवार को लगातार दो ट्वीट करके उन्होंने इस मामले पर बीजेपी को कटघरे में खड़ा किया है. मायावती ने सीधे बीजेपी आलाकमान की नीयत पर सवाल खड़ा करता हु पूछा है कि वो अपने नेताओं को सांप्रदायिक सद्भाव बिगाडऩे वाले बयान देने से आखिर क्यों नहीं रोकती?
दरअसल, हैदराबाद में पैगंबर मोहम्मद पर टिप्पणी करने वाले बीजेपी विधायक टी राजा के खिलाफ सोमवार से ही प्रदर्शन जारी है. इस पर बीएसपी प्रमुख मायावती ने लगातार दो ट्वीट किए. पहले ट्वीट में उन्होंने कहा कि अभी बीजेपी से निलंबित नुपूर शर्मा द्वारा पैगंबर-ए-इस्लाम के खिलाफ विवादित टिप्पणी पर देश भर में गर्माया माहौल पूरी तरह से ठंडा भी नहीं हो पाया है कि बीजेपी के अन्य नेता तेलंगाना के विधायक राजा सिंह ने उसी प्रकार का उत्तेजनात्मक कार्य किया है, जो अति-शर्मनाक और घोर निंदनीय है. बीएसपी प्रमुख यहीं नहीं रुकी, उन्होंने अपने अगले ट्वीट में लिखा कि हालांकि, तेलंगाना सरकार ने बीजेपी विधायक को आज हैदराबाद में गिरफ्तार कर लिया है, लेकिन क्या यह बीजेपी नेतृत्व की जिम्मेदारी नहीं बनती है कि वह अपने लोगों को संयमित और नियंत्रित रखकर देश में अमन-शांति कायम रखने के साथ-साथ विदेशों में भारत की छवि को भी आघात लगने से बचाए.
पिछले हफ्ते मायावती ने हमीरपुर में एक छात्रा के साथ हुई हैवानियत को लेकर योगी सरकार पर जबरदस्त हमला बोला था. गौरतलब है कि हमीरपुर जिले में लडक़ी के साथ दरिंदगी का शर्मनाक वीडियो वायरल हुआ था. बताया कि 16 अगस्त को पीड़ित लडक़ी अपने दोस्त के साथ शहर के बाहर स्थित सिटी फारेस्ट में घूम रही थी. तभी 6 लोगों ने उन्हें पकड़ लिया और दोनों की बेरहमी से पिटाई की. इसके साथ ही लडक़ी के कपड़े उतारकर उसके साथ अश्लीलता करते हुए वीडियो बनाकर वायरल कर दिया. इस शर्मनाक वीडियो के वायरल होने के बाद जिले में सनसनी फैल गई थी. पुलिस ने खुद मामले का संज्ञान लेते हुए वीडियो में दिख रहे 6 दरिंदों के खिलाफ संगीन धाराओं में मामला दर्ज कर लिया. 6 में से 5 को जेल भेज दिया था. इस घटना पर बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने ट्वीट करते हुए इसे यूपी में जंगलराज का उदाहरण बताया था.
बीएसपी प्रमुख मायावती ने हमीरपुर की हैवानियत के साथ की और मुद्दों पर बीजेपी को घेरते हुए यूपी की योगी सरकार का शासनकाल को जंगलराज करार दिया था. पिछले शुक्रवार उन्होंने ट्वीट किया कि बांदा जिले में यमुना नदी पर निर्माणाधीन पुल के सालों से अधूरे पड़े रहने के कारण नाव हादसे में कई लोगों की मौत हो गई. हापुड़ में पेशी पर आए आरोपी की दिन दहाड़े हत्या और अब हमीरपुर में सामूहिक दुष्कर्म की दर्दनाक घटना साबित करती है कि उत्तर प्रदेश में जंगलराज है और विकास का ढिंढोरा छलावा मात्र है!
मायावती ने आगे कहा कि उत्तर प्रदेश में आपराधिक तत्वों का बेखौफ हो जाना लचर कानून-व्यवस्था का सबूत है. इनका विकास भी कुछ खास जिलों तक सीमित है, जबकि प्रदेश के हर क्षेत्र में गरीबी और बेरोजगारी है. सरकार इस ओर जरूर ध्यान दें. गौरतलब है कि बांदा जिले के समगरा गांव में 11 अगस्त को एक नाव पलटने से उस पर सवार 11 लोगों की मौत हो गई थी. वहीं, 16 अगस्त को हापुड़ के जिला एवं सत्र न्यायालय के बाहर हरियाणा के हिस्ट्रीशीटर की तीन लोगों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी. इस वारदात में एक पुलिस कांस्टेबल घायल हो गया था.
मायावती का अचानक बदला हुआ ये रुख आश्चर्यजनक है. यूपी में चुनाव के बाद मायावती बीजेपी और योगी सरकार पर हमला करने से बच रही थी. दरअसल, उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में उन पर बीजेपी को अंदरूनी तौर पर मदद पहुंचाने का आरोप लगा था. इधर यह भी चर्चा चल रही थी कि अगले लोकसभा चुनाव में बीजेपी को फायदा पहुंचाने के लिए वो बीजेपी के साथ कोई गुप्त समझौता कर सकती हैं. मायावती पर उत्तर प्रदेश में हाल ही में हुए लोकसभा के उपचुनाव में भी बीजेपी को मदद करने के आरोप लगे हैं.
गौरतलब है कि उपचुनाव में बीएसपी ने रामपुर में अपना उम्मीदवार नहीं उतारा, लेकिन मुस्लिम बाहुल्य आजमगढ़ में एक मजबूत मुस्लिम चेहरा उतार दिया. माना जाता है कि इससे सपा के वोट बैंक में सेंधमारी हुई और बीजेपी उम्मीदवार दिनेश लाल यादव निरहुआ जीत गए. बीजेपी भी किसी न किसी बहाने बसपा के साथ अपनी नजदीकियों का प्रदर्शन करती रहती है. इसलिए बीजेपी के खिलाफ मायावती के आक्रामक तेवरों को पर हैरानी हो रही है.
बीजेपी के खिलाफ अचानक आक्रमण हुए बीएसपी प्रमुख मायावती के तारों को उनकी भविष्य की राजनीति से जोडक़र देखा जा रहा है. माना जा रहा है कि मायावती बीजेपी के खिलाफ आक्रामक होकर मुसलमानों को रिझाने की कोशिश कर रही हैं. हैदराबाद में बीजेपी विधायक टी राजा के पैगंबर मोहम्मद के दिए गए बयान के बाद मुस्लिम समुदाय सडक़ों पर है. पुलिस ने विधायक के राजा के खिलाफ दर्ज कर ली है.
मायावती पैगंबर के अपमान के खिलाफ खड़ी होकर ये संदेश देना चाहती है कि वो मुसलमानों के धार्मिक मुद्दों पर समुदाय के साथ खड़ी है. उत्तर प्रदेश में मुसलमानों के छिटकन की वजह से ही बीएसपी पर अस्तित्व बचाने की संकट खड़ा हुआ है. लिहाज़ा मायावती मुस्लिम वोटरों को फिर से अपनी तरफ खींचने की कोशिश कर रही हैं. उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में बीएसपी को मुसलमानों का वोट नहीं मिला था. क्योंकि चुनाव के दौरान चर्चा थी कि मायावती अंदरूनी तौर पर बीजेपी को मात्र कर रही हैं. लगता है कि बीजेपी के खिलाफ आक्रामक रुख बनाकर मायावती अपने ऊपर लगे इस दाग को धोने की कोशिश कर रही हैं.
उत्तर प्रदेश में राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मुसलमानों के एकमुश्त समाजवादी पार्टी की तरफ झुकाव की वजह से बसपा का आधार दलित वोटों का बड़ा हिस्सा बीजेपी की तरफ चला गया है. अगर मुसलमान बीएसपी की तरफ वापस आते हैं तो दलित भी उसके पास वापस आ सकते हैं. इसी रणनीति के तहत मायावती ने आजमगढ़ के लोकसभा के उपचुनाव में मुस्लिम उम्मीदवार उतारा था. उसे ढाई लाख से ज्यादा वोट भी मिले. इसी वजह से सपा अपने सबसे मजबूत किले में हारी. लेकिन सपा को हराने मात्र से बसपा मजबूत नहीं होगी. इससे बीजेपी को मजबूती मिल रही है. आम जनता में मायावती की पर्दे के पीछे बीजेपी को मदद पहुंचाने वाले नेती की छवि बन गई है. ये उनके राजनीतिक भविष्य के लिए नुकसानदेह है. शायद इसका अहसास अब मायावती को हो गया है. इसलिए अब वो बीजेपी के खिलाफ मुखर होकर बोलने लगी हैं.

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