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नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में कार्यवाही के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने वकीलों द्वारा बार-बार नए मामलों में स्थगन की मांग करने पर चिंता जाहिर की. उन्होंने वकीलों से आग्रह किया कि वे तब तक स्थगन नोटिस दाखिल न करें जब तक कि बिल्कुल जरूरी न हो. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि वह नहीं चाहते कि अदालत को ‘तारीख-पे-तारीख’ अदालत के रूप में जाना जाए.
चीफ जस्टिस ने सनी देओल की बॉलीवुड फिल्म दामिनी के एक मशहूर डायलॉग का जिक्र किया, जिसमें अदालतों में स्थगन के इस चलन की आलोचना की गई थी. मुख्य न्यायाधीश ने अदालत में नए मामलों को दाखिल करने और लिस्ट करने के बीच समय के अंतर को कम करने में वकीलों की कोशिशों को स्वीकार किया. हालांकि, उन्होंने इस सच्चाई पर निराशा जताई कि मामलों के बेंच के सामने लिस्टिंग होने के बाद भी, वकील स्थगन की मांग करते हैं, जिससे कोर्ट के प्रति नेगेटिव ओपिनियन बनता है.
मुख्य न्यायाधीश चंद्रचूड़ ने दायर की गई स्थगन नोटिस का जिक्र किया और बताया कि अकेले 3 नवंबर के लिए 178 नोटिस पेंडिंग थीं और सितंबर और अक्टूबर के बीच कुल 3,688 स्थगन नोटिस दायर की गईं. चीफ जस्टिस कोर्ट में पेंडिंग मामलों से पहले ही चिंतित थे और मामलों को जल्द निपटाने के लिए कई पहलें भी शुरू कीं. अब जबकि वकील बार-बार तारीख-पे-तारीख की डिमांड करते हैं, चीफ जस्टिस नाराज हो गए और कहा कि इससे मामलों की निपटाने की प्रक्रिया धीमी पड़ जाती है.
चीफ जस्टिस ने ऐसा पहली बार नहीं है कि फिल्म दामिनी का उदाहरण दिया है और वकीलों से तारीख-पे-तारीख के कल्चर को खत्म करने की प्रतिबद्धता जताई है. पिछले साल भी उन्होंने यही बात कही थी और वकीलों से नाराजगी जताई थी. फिल्म में सनी देओल का किरदार, एक वकील, अदालत में बार-बार स्थगन और कई तारीखें दिए जाने के बावजूद न्याय नहीं मिलने पर निराशा जाहिर करता है. इसी तरह लगातार स्थगन की मांग करने वाले वकीलों से निराश जस्टिस चंद्रचूड़ ने सुप्रीम कोर्ट में कई स्थगन की प्रथा को बदलने की अपनी मंशा जाहिर करते हुए फिल्म का उदाहरण दिया था.
Modern Bureaucracy