| Getting your Trinity Audio player ready... |
लखनऊ,(मॉडर्न ब्यूरोक्रेसी न्यूज)। एक व्यक्ति द्वारा किया गया रक्तदान तीन व्यक्तियों की जिंदगियां बचाता है हमें नियमित अंतराल पर रक्तदान करते रहना चाहिए इससे शरीर स्वस्थ्य रहता है और चित्त भी शांत रहता है। एक व्यावसायिक समाज कार्यकर्ता होने के नाते मेरा ये कर्तव्य है कि हम पीड़ितों की सेवा में लगे रहें और मानवता की रक्षा करें। यह बातें समाज कार्य विभाग लखनऊ विश्वविद्यालय स्थित पंडित दीन दयाल उपाध्याय शोध पीठ के निदेशक प्रो. अनूप कुमार भारतीय ने रक्तदाताओं को संबोधित करते हुए कहे। उन्होंने कहा कि हम किसी को दान दें या न दें लेकिन रक्तदान करते रहें क्योंकि इससे जीवन के साथ-साथ समाज को भी बचाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि आज का यह कार्यक्रम कुलाधिपति श्रीमती आनंदी बेन की प्रेरणा और हमारे कुलपति प्रो. अलोक कुमार राय के कुशल मार्गदर्शन से हो रहा है।
बताते चलें कि उत्तर प्रदेश सरकार के उच्च शिक्षा विभाग ने लखनऊ विश्वविद्यालय के समाज कार्य विभाग में पंडित दीनदयाल उपाध्याय शोध पीठ की स्थापना की है जिसका कार्य पंडित जी के व्यक्तित्व और कृतित्व पर शोध कार्यों को आगे बढ़ाना है साथ ही अन्त्योदय के अंतर्गत समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचने का मार्ग भी प्रशस्त करना है जिससे सामाजिक विकास के कार्यों को प्रोत्साहन मिले. इसी क्रम में आज उनकी जयंती पर शोध पीठ और ‘एक कोशिश ऐसी भी’ सामाजिक संस्था के संयुक्त तत्वाधान में रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया. जिसमे छात्रों, लखनऊ विश्वविद्यालय के एनसीसी 64 बटालियन के कैडेट्स और शिक्षकों ने बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया। शिविर में सामाजिक संस्था के किशोर बच्चों द्वारा रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुत किया गया. उन्होंने नुक्कड़ नाटक और समूह नृत्य के माध्यम से रक्तदान के महत्व को युवाओं के साथ साझा किया. विद्यार्थियों के बीच रक्तदान से सम्बंधित क्विज भी आयोजित हुई जिससे रक्तदान से सम्बंधित तमाम भ्रांतियों का निदान भी सामने आया। उन्होंने बताया कि आज के आयोजन में एक बात यह भी तय की गयी कि रक्तदाताओं को अब “रक्तवीर” के नाम से जाना जाए। जिससे समाज के अन्य व्यक्ति व्ही सामने आकर रक्तदान कर भारत में रक्त की कमी को पूरा कर सकने के लिए प्रेरित हों. ‘एक कोशिश ऐसी भी’ की अध्यक्षा छाया वर्मा ने अपने संबोधन में उपस्थित छात्रों से रक्तदान के महत्व को साझा करते हुए अपने अनुभव साझा किये कि कैसे शहरी और ग्रामीण अंचलों में अभी भी रूढ़ियों और भ्रांतियों के चलते लोग रक्तदान करने से कतराते हैं। इस अवसर प्रो. राज कुमार सिंह, प्रो. डी. के. सिंह, कुलानुशासक प्रो. राकेश द्विवेदी, डॉ. रूपेश कुमार, डॉ. रोहित मिश्र, डॉ. रजनीश यादव सहित विभाग के सभी शिक्षक और एक कोशिश ऐसी भी के चंद्रशेखर वर्मा आदि उपस्थित रहे।
Modern Bureaucracy