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नई दिल्ली। राष्ट्रीय क्रांति पार्टी के लक्षद्वीप से नेता मोहम्मद फैजल की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई से पहले लोकसभा सचिवालय ने उनकी लोकसभा से अयोग्यता पर अपने आदेश को रद्द कर दिया। फैजल को हत्या के प्रयास के मामले में 10 साल की जेल की सजा के बाद सांसदी से अयोग्य घोषित कर दिया गया था, लेकिन केरल उच्च न्यायालय (्यद्गह्म्ड्डद्यड्ड ॥द्बद्दद्ध ष्टशह्वह्म्ह्ल) ने 25 जनवरी को उनकी सजा पर रोक लगा दी थी। लोकसभा सचिवालय द्वारा 13 जनवरी को जारी एक अधिसूचना के अनुसार कवारत्ती में एक सत्र अदालत द्वारा हत्या के मामले में दोषी करार और सजा के बाद मोहम्मद फैजल की सांसदी रद्द कर दी गई थी। मोहम्मज फैजल की सांसदी जाने और फिर बहाल होने से राहुल गांधी के लिए भी उम्मीद की एक किरण दिखाई पड़ी है।
1 जनवरी को लक्षद्वीप में कवारत्ती जिला सत्र अदालत ने 2009 के लोकसभा चुनाव से पहले द्वीप में एक हिंसा के दौरान एक कांग्रेस कार्यकर्ता को मारने के इरादे से हमला करने के लिए फैजल को उसके भाई सहित तीन अन्य लोगों के साथ दोषी ठहराया था। इसी आधार पर उनकी सांसदी रद्द कर दी गई थी, जिस पर केरल हाई कोर्ट ने स्टे लगा दिया था। इसके बावजूद सदन की कार्यवाही में भाग नहीं लेने देने पर मोहम्मद फैजल ने अधिवक्ता केआर शशिप्रभु के माध्यम से शीर्ष अदालत में दायर की। उन्होंने अपनी याचिका में सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि उच्च न्यायालय द्वारा उनकी दोषसिद्धि पर रोक लगाने के बावजूद लोकसभा सचिवालय अधिसूचना वापस लेने में विफल रहा है।
फैजल की सांसदी की बहाली से कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर असर पडऩे की उम्मीद है, जिन्हें गुजरात के सूरत की एक अदालत द्वारा आपराधिक मानहानि के मामले में दोषी ठहराए जाने और दो साल की सजा के बाद पिछले शुक्रवार को उन्हीं नियमों के तहत अयोग्य घोषित कर दिया गया था। राहुल गांधी की कानूनी टीम ने संकेत दिया कि वे इस सप्ताह के अंत में गुजरात में सत्र अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे। इसके बाद लोकसभा सचिवालय ने राहुल गांधी से एक महीने में सरकारी आवास खाली करने को कहा है। इसके जवाब में राहुल गांधी ने आश्वासन दिया कि वह निर्धारित समय के भीतर घर खाली कर देंगे।