| Getting your Trinity Audio player ready... |

लखनऊ,(मॉडर्न ब्यूरोक्रेसी न्यूज)ःभारतीय समाज की संरचना, उसकी जटिलताएँ और उसमें व्याप्त असमानताएँ सदियों से विचार और संघर्ष का विषय रही हैं। इस संघर्ष को दिशा देने वाले महान व्यक्तित्वों में भीमराव अम्बेडकर का स्थान अत्यंत ऊँचा है। उन्होंने न केवल सामाजिक अन्याय के खिलाफ आवाज़ उठाई, बल्कि एक ऐसे समाज की कल्पना की जिसमें समानता, स्वतंत्रता और बंधुत्व के सिद्धांत वास्तविक रूप में स्थापित हों। आज जब हम 21वीं सदी में तेजी से बदलते सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक परिदृश्य को देखते हैं, तो यह प्रश्न स्वाभाविक रूप से उभरता है,क्या आने वाला समय वास्तव में अम्बेडकर की विचारधारा का है ? यह बातें बाबा सहाब भीमराव अम्बेडकर की जयंती कार्यक्रम मना रहे सचिवालय संघ के अध्यक्ष अर्जुन देव भारती ने कही। इस अवसर पर सचिवालय संघ के तमाम पदाधिकारी कार्यकर्ता व सचिवालय परिवार के लोग उपस्थित थे।

वहीं अम्बेडकर स्मारक स्थित नगर निगम द्वारा पिछले कई सालों से सबसे बड़े स्टॉल का प्रतिनिधित्व कर रहे पूर्व चीफ इंजीनियर एस के अम्बेडकर कहते हैं कि आज के दिन का वह और उनकी टीम बेसब्री से इंतजार रहता है, उन्होंने बताया कि अम्बेडकर जयंती में आये हुये हजारों श्रद्धालू उनके स्टॉल से भरपेट भोजन करते हैं, नगर निगम लखनऊ द्वारा बड़े ही भव्य तरीके से अम्बेडकर जयंती मनाता चला आ रहा है, अम्बेडकर जयंती के इस मौके पर राज्यसभा सांसद व पूर्व उप मुख्यमंत्री दिनेष षर्मा सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित थे। वहीं इस मौके पर पूर्व चीफ इंजीनियर एस के अम्बेडकर कहते हैं कि अम्बेडकर की विचारधारा किसी एक मुद्दे तक सीमित नहीं थी। यह एक समग्र दृष्टिकोण था जो सामाजिक न्याय, मानवाधिकार, लोकतंत्र और संवैधानिक मूल्यों पर आधारित था। उनका मानना था कि किसी भी समाज की प्रगति तभी संभव है जब उसमें सभी व्यक्तियों को समान अवसर और सम्मान प्राप्त हो। उन्होंने भारतीय समाज की सबसे बड़ी समस्या जाति व्यवस्था को जड़ से समाप्त करने की आवश्यकता पर बल दिया। उनके अनुसार, जाति केवल सामाजिक विभाजन नहीं, बल्कि मानवता के खिलाफ एक व्यवस्था है जो व्यक्ति की स्वतंत्रता और गरिमा को नष्ट करती है। अम्बेडकर का सबसे महत्वपूर्ण योगदान समानता के सिद्धांत को स्थापित करना था। उनके अनुसार, समानता केवल कानून में नहीं, बल्कि समाज के व्यवहार में भी दिखाई देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इसके बावजूद, यह भी सच है कि आज पहले की तुलना में स्थिति में सुधार हुआ है। इसका श्रेय काफी हद तक अम्बेडकर की विचारधारा को जाता है, जिसने समाज को जागरूक किया।

शिक्षा का अधिकार के तहत बच्चों को शिक्षा देने की अनूठी मुहिम चला रहे आदि अम्बेडकर विद्यार्थी परिषद के अमित नायब हर साल प्राइवेट स्कूलों में कमजोर तबको से आये बच्चों स्कूलों फ्री शिक्षा के लिए एडमिषन दिलाने का काम करते हैं। इसमें वह अपनी टीम का काफी धन्यवाद देते हैं जो षिक्षा की अलख जलाने वाले इस पवित्र कार्य में दिन रात जी तोड़ मेहनत करती है, उनकी इस मुहिम से लगभग 5 हजार से अधिक बच्चों को स्कूलों में दाखिला दिलाया जा चुका है। इस फाउडेषन के अध्यक्ष अमित नायब कहते हैं कि आज के समय में, जब अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, निजता के अधिकार और व्यक्तिगत विकल्पों की बात हो रही है, तो अम्बेडकर के विचार और अधिक प्रासंगिक हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि अम्बेडकर ने बंधुत्व को समाज की एकता का आधार माना। उनके अनुसार, यदि समाज में बंधुत्व नहीं होगा, तो न समानता टिकेगी और न ही स्वतंत्रता। आज के समाज में, जहाँ धार्मिक, जातीय और सांस्कृतिक विभाजन बढ़ते दिखाई देते हैं, वहाँ बंधुत्व की आवश्यकता और भी अधिक महसूस होती है। अमित नायब ने कहा कि अम्बेडकर को भारतीय संविधान का मुख्य शिल्पकार माना जाता है। उन्होंने एक ऐसा संविधान तैयार किया जो सभी नागरिकों को समान अधिकार देता है और राज्य को उत्तरदायी बनाता है। उन्होंने कहा कि आज भारत में लोकतंत्र की मजबूती और नागरिक अधिकारों की रक्षा में संविधान की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह अम्बेडकर की दूरदर्शिता का प्रमाण है। अम्बेडकर का प्रसिद्ध नारा “शिक्षित बनो, संगठित रहो, संघर्ष करो” आज भी उतना ही प्रासंगिक है।

बैंक आफ महाराष्ट्र एससी, एसटी एवं ओबीसी एम्पलायज एसोसियेषन के तत्वाधान में बाबा साहब बी आर अम्बेडकर की 135वीं जयंती के अवसर पर संगठन द्वारा बाबा साहब की जयंती के कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर कार्यक्रम के मुख्य अतिथि अंचल प्रबंधक अमित गोयल, उप अंचल प्रबंधक संजू कुमारी व दिलीप कुमार सचिव, राजकुमार बाल्मिकी अध्यक्ष, नलिन कुमार कोषाध्यक्ष, अर्जुन प्रसाद जायसवाल अंचल उपाध्यक्ष, सहित बैंक आफ महाराष्ट्र के लखनऊ अंचल के समस्त स्टाफ उपस्थित थे। वहीं डा. अम्बेडकर राष्ट्रीय एकता मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष भवनाथ पासवान ने अपने विचार व्यक्त किये।
इसके अलावा धानुक समाज बौद्धिक सामाजिक समिति के अध्यक्ष किषोर कुमार धानुक ने भी समाज के अन्य साथ्यिों के साथ बाबा साहब की जयंती मनाकर, उनके आदर्षो पर चलने का सूत्रवाक्य दोहराया। अध्यक्ष किषोर कुमार धानुक ने कहा कि शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन का सबसे प्रभावी साधन माना। आज, जब शिक्षा का प्रसार बढ़ रहा है और अधिक लोग उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं, तो यह स्पष्ट होता है कि अम्बेडकर की सोच धीरे-धीरे साकार हो रही है। आज के भारत में अम्बेडकर की विचारधारा कई रूपों में दिखाई देती है। उन्होंने बताया कि समाज में मीटिगों के माध्यम से षिक्षा के प्रचार और प्रसार के लिए जागरूकता कार्यक्रम चलाया जाता है। इस अवसर पर दिलीप कुमार धानुक, राजकपूर धानुक, धनीराम धानुक, राज धानुक, व अजय धानुक सहित अन्य लोग उपस्थित थे।
Modern Bureaucracy