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उत्तराखंड में 9 गुलदारों को मिला आजीवन कारावास!

देहरादून। उत्तराखंड से एक रोचक खबर सामने आ रही है. जहां जानवरों को भी उम्रकैद हो सकती है. ऐसा ही एक मामला हरिद्वार के पास चिडिय़ापुर में स्थित रेस्क्यू और पुनर्वास सेंटर में ऐसे ही 9 गुलदार हैं, जोकि आजीवन कारावास की तरह अपनी सजा काट रहे हैं. वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि उनकी आगे की उम्र इसी पुनर्वास सेंटर में गुजरेगी. फिलहाल, वे अब ना जंगल देख पाएंगे और ना ही खुली आजादी से घूम पाएंगे. इसलिए उनको वहां पर कैद करके रखा गया है. बता दें कि, यहां इंसानी कत्ल या फिर इंसानी बस्ती में घुसने के जुर्म में नौ गुलदारों को जेल में रखा गया है.

दरअसल, प्रदेश के अन्य इलाकों से पकड़े गए ये 9 गुलदार सालों से पिंजरे में कैद हैं. जहां कैद भी ऐसी है जिसमें रिहाई की उम्मीद न के बराबर है. वहीं, अब ये अब कभी वापस जंगल में नहीं जा पाएंगे. ये एक तरह से आजीवन कारावास की सजा काट रहे हैं. इन सजायाफ्ता कैदियों को रूबी, रॉकी, दारा, मुन्ना, जाट, मोना, गब्बर, जोशी नाम से पुकारा जाता है. इनको वहां चिकन, मटन और अन्य तरह का मांस भी खाने को दिया जाता है. इन्हें कुछ देर के लिए बाड़े में भी छोड़ा जाता है, मगर फिर पिंजरे में कैद कर दिया जाता है.
वहीं, रूबी नाम की मादा गुलदार पिछले सात सालों से सजा काट रही है. इन्हें दिन के उजाले में कुछ घंटे के लिए खुले बाड़े में छोड़ा जाता है और फिर पिंजरें में कैद कर दिया जाता है. जहां हफ्ते में एक दिन चिकन, एक दिन मटन और एक दिन मोटा मांस खाने को दिया जाता है. मगर, मंगलवार को नौ के नौ कैदियों को उपवास रखना होता है. इस दौरान रूबी को साल 2015 में इंसान के कत्ल के आरोप में पकड़ा गया था, जब वो महज 6 साल की थी. वहीं, 13 साल के आदमाखोर रॉकी को 2017 में टिहरी के संतला गांव से पकड़ा गया था. इनकी जिंदगी एक सजायाफ्ता कैदी जैसी ही है.
इस दौरान वन विभाग का कहना है कि इनमें से कई गुलदारों के दांत तक टूटे हुए हैं, साथ ही कुछ की आंखों और पैरों में भी चोट है. जिसके चलते वे अब जंगल में नहीं रह सकते. इस मामले में चीफ वाडल्ड लाइफ वार्डन डा. समीर सिन्हा ने बताया कि इन जानवरों को पकडक़र कैद कर रखा जाता है. ऐसे में कुछ आदमखोर हो गए हैं. इसके अलावा कुछ अपंग भी हो गए हैं, जिससे इनका जंगल में खतरें से खाली नहीं है. साथ ही ये दूसरे की जान के लिए भी खतरा बने हुए है.

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